दैनिक भास्कर हिंदी: तीन राज्यों में बीजेपी हार मोदी की हार और राहुल की जीत है : चव्हाण

December 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस को मिली जीत ने महाराष्ट्र कांग्रेस में जान फूंक दी है। मंगलवार को चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस कार्याकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एकत्र होकर जश्न मनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर जीत पर खुशी जताई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चव्हाण ने इस जीत का श्रेय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देते हुए कहा कि इसका असर महाराष्ट्र पर भी होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां भी हम जीत हासिल करेंगे।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चव्हाण ने कहा कि यह अहंकार पर विनम्रता की जीत है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी जी जाने वाले हैं और राहुल जी आने वाले हैं। एक सवाल के जवाब में चव्हाण ने कहा कि इस बार भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी नहीं कर सकी। विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखेपाटील ने कहा कि यह लोकसभा चुनाव के पहले सेमीफाईल था जिसे कांग्रेस ने जीत लिया है। विखेपाटील ने कहा कि सिर्फ प्रचार व इवेंट मैनेजमेंट के भरोसे हमेशा चुनाव नहीं जीता जा सकता।   

हिंदी पट्टी में हार से सकते में भाजपा नेतृत्व

लोकसभा चुनाव से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने कांग्रेस के अच्छे दिन ला दिए हैं तो वहीं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सकते में है। इन चुनावों में न तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का सियासी दांवपेंच चला और न ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू। अपनी हर चुनावी जीत पर जश्न मनाने के आदी अमित शाह आज खामोश रहे तो मोदी भी चुनाव नतीजांे पर बोलने से बचते नजर आए। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा की हार को पार्टी हलकों में देश के किसानों को नजरअंदाज करने की केन्द्र की नीति का परिणाम माना जा रहा है। इसके साथ ही भाजपा नेताओं द्वारा गांधी परिवार पर की गई अनावश्यक टिप्पणी और सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी भी हार की वजहों में गिनाई जा रही है।    

किसानों ने गुजरात चुनाव में ही चेताया था  

चुनाव नतीजों पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने भले ही चुप्पी साध ली हो, परंतु पार्टी की प्रदेश इकाईयों का कहना है कि केन्द्रीय नेतृत्व किसानों की नाराजगी ठीक से भांप नहीं पाया, जिसका परिणाम सामने है। यह अलग बात है कि किसानों ने गुजरात चुनाव मंे ही भाजपा को साफ संदेश दे दिया था। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सच्चाई यह है कि अहंकार में डूबे केन्द्रीय नेताओं ने किसानों की समस्याओं को तरजीह नहीं दी। यहां तक जब पूरे देश के किसान अपनी पीड़ा के साथ पिछले 30 नवंबर को दिल्ली पहुंचे, तब भी सरकार या फिर भाजपा का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलना उचित नहीं समझा। इसका प्रतिकूल संदेश न केवल अन्नदाताओं के बीच गया बल्कि देश की जनता ने भी इसे भाजपा का अहंकार माना। इसके उलट राहुल गांधी सहित विपक्ष के लगभग सभी नेता संसद मार्ग पर किसानों के जख्म पर मरहम लगाने पहुंचे।

सूत्र बताते हैं कि मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार द्वारा किसानों के हक में लिए कुछ अच्छे फैसलों का असर रहा कि वहां भाजपा अंत तक कांग्रेस से लोहा लेती दिखी। भाजपा के एक सांसद ने कहा कि गांधी परिवार पर भाषा का मर्यादा तोड़कर हमला करना और धार्मिक आधार पर ध्रवीकरण करने की कवायद भी हमारे खिलाफ गया। भाजपा को अब ऐसे विवादित मसलों से आगे बढ़कर मोदी सरकार के कामकाज को दिखाना होगा। यह भी माना जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी ने भी आग में घी का काम किया है।