गाइड लाइन की अनदेखी का असर: छतरपुर जिले में फिर कोरोना की दस्तक, एक सप्ताह में तीसरा पॉजीटिव मिला

October 11th, 2021

डिजिटल डेस्क छतरपुर। कोरोना गाइड लाइन की अनदेखी भारी पडऩे लगी है। नतीजतन कोरोना की दूसरी लहर ने प्रभावी असर दिखाना शुरू कर दिया है। जिले में दूसरे दिन शनिवार को फिर एक कोरोना मरीज सामने आया है। जिले में अब दो एक्टिव केस हो गए हैं। शहर के नजरबाग मोहल्ले में रहने वाली 65 वर्षीय महिला की कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मोहल्ले के लोगों की सैम्पलिंग कराई थी, जिसमें महिला पॉजीटिव मिली। बाकी लोगों के सैम्पल निगेटिव आए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन 500 लोगों से अधिक लोगों के सैम्पल लिए जा रहे हैं। एक दिन पहले रविवार को लवकुशनगर में रहने वाले 43 वर्षीय शिक्षक की रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। उनका भी जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। शिक्षक के परिवार एवं अन्य संपर्क में आए लोगों के भी सैम्पल लिए गए हैं। कुछ दिन पहले घुवारा के वार्ड-9 में रहने वाले तीसरी कक्षा का छात्र कोरोना संक्रमित पाया गया था। हालांकि स्वस्थ होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।
19 मई 2020 को मिला था पहला मरीज
जिले में कोरोना का पहला मरीज 19 मई 2020 को मिला था। मरीज नौगांव का रहने वाला है। जब यह मरीज सामने आया था, उस समय जिलेभर में हड़कंप की स्थिति बनी थी। प्रशासन ने आनन-फानन में मरीज के घर के आसपास कंटेंटमेंट एरिया घोषित कर दिया था। इसके बाद तो संक्रमितों के मिलने का सिलसिला तेजी से बढ़ता गया।
अब तक 9837 कोरोना पॉजीटिव मिले
जिले में कोरोना काल से अभी तक 9837 लोग कोरोना पॉजीटिव पाए जा चुके हैं। सात बार जिले को कोरोना मुक्त घोषित किया जा चुका है। जब भी जिले को कोरोना मुक्त घोषित किया, तभी एक संक्रमित मरीज सामने आया। हालांकि यह आंकड़ा उन मरीजों का है, जिनकी जांचें जिले के अंदर हुई हैं। कई मरीज ऐसे भी हैं, जिन्होंने बाहर इलाज कराया है, उनकी गिनती नहीं की गई है। अब तक ढाई लाख से अधिक सैम्पल लिए जा चुके हैं।
संक्रमितों की मौत के
आंकड़ों पर असमंजस
कोरोना काल में संक्रमितों की मौत के आंकड़ों पर भी असमंजस बना हुआ है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अभी तक 149 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है। गैर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो यह संख्या तीन सौ से ऊपर बताई जा रही है। सैकड़ों लोग छतरपुर के रहने वाले थे, लेकिन उनकी मौत भोपाल या सागर में हुई। इस कारण वे गिनती में छोड़ दिए गए हैं।
 

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