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श्रमिकों के शोषण पर कोर्ट ने लिया संज्ञान - पीआईयू के ईई और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज

श्रमिकों के शोषण पर कोर्ट ने लिया संज्ञान - पीआईयू के ईई और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज

डिजिटल डेस्क सिंगरौली(वैढऩ)। जेल भवन के निर्माण में श्रमिकों को निर्धारित मजदूरी का भुगतान नहीं करने पर संघवी इंटरप्राइजेज के ठेकेदार जीतेन्द्र सिंह और पीआईयू के ईई के खिलाफ भी श्रम विभाग ने कोर्ट में मामला दायर किया है। श्रम विभाग के परिवाद पत्र पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुये आरोपियों की उपस्थित के लिये नोटिस जारी किया है। आरोप है कि पीआईयू के ईई के संरक्षण में ठेकेदार द्वारा श्रमिकों का आर्थिक शोषण कर रहा था। श्रम विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि ठेकदार द्वारा नियमों को ताक पर रखकर श्रमिकों के सुविधाओं की अनदेखी की जा रही थी। जांच में यह बात भी सामने आई है कि श्रमिकों से दोगुना काम लेने के बाद भी ओवर टाइम की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था। श्रम निरीक्षक नवनीत पांडेय ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण तैयार कर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया था। श्रम निरीक्षक की जांच रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि ठेकेदार द्वारा न्यूनतम वेतन अधिनियम की कई धाराओं का उल्लंघन किया जा रहा था।
42.57 लाख क्षतिपूर्ति का दावा पेश
सीजेएम की न्यायालय में कार्रवाई प्रस्तावित करते हुये श्रम विभाग की टीम ने ठेकेदार से श्रमिकों को 42 लाख 57 हजार की क्षतिपूर्ति दिलाये जाने की मांग की है। श्रमिकों का राहत प्रदान करने के श्रम निरीक्षक ने ठेकेदार और पीआईयू के ईई से श्रमिकों के भुगतान में नुकसान की भरपाई करने के लिये अदालत के समक्ष यह कार्रवाई की है। कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते आरोपियों की न्यायालय में उपस्थित के लिये नोटिस जारी किया है।
प्रोजेक्ट इंजीनियर और संविदाकार पर भी केस दर्ज
पचौर में पुलिस के लिये आवास के निर्माण में सिल्वर गेट इन्फ्रास्ट्रक्चर के द्वारा श्रमिकों का आर्थिक शोषण करने पर श्रम विभाग के परिवाद पत्र पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुये ठेकेदार सोमिल सिंह पर मामला दर्ज किया है। इस मामले में अदालत ने आरोपियों को नोटिस जारी करते हुये न्यायालय में हाजिर होने के भी आदेश दिये हंै। श्रम निरीक्षक ने इस मामले लापरवाही पाये जाने पर पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के रीवा के प्रोजेक्ट इंजीनियर को भी सह आरोपी बनाया है। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा श्रमिकों को कम मजदूरी दी जा रही थी। जांच में यह भी पाया गया है कि ठेकेदार ने कार्यस्थल में उपस्थिति पंजी संधारित नहीं पाई गई। ठेकेदार द्वारा 24 श्रमिकों से ओवर टाइम काम लेने के बाद भी मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था। इतना ही नहीं ठेकेदार द्वारा श्रम विभाग में पंजीयन के बगैर पुलिस विभाग के आवासों का श्रमिकों से निर्माण कराया जा रहा था। इस मामले में निर्माण एजेंसी की घोर लापरवाही पाये जाने श्रम विभाग ने आरोपी ठेकेदार और पुलिस विभाग के प्रोजेक्ट इंजीनियर के सीजेएम की अदालत में प्रकरण दायर किया था। 
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।