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मौत के आठ घंटे बाद तक जिला अस्पताल में  पड़ा रहा शव, 15 दिन से भर्ती वृद्ध को नहीं दिया उपचार

मौत के आठ घंटे बाद तक जिला अस्पताल में  पड़ा रहा शव, 15 दिन से भर्ती वृद्ध को नहीं दिया उपचार

 डिजिटल डेस्क,छतरपुर। जिला अस्पताल के मेल वार्ड के बाहर पड़े बीमार बुजुर्ग ने आखिरकार 15 दिन बाद इलाज के अभाव में दम तोड़ ही दिया। 5 अगस्त को बीमार बुजुर्ग रामचरण पिता लल्लू अहिरवार उम्र 80 साल को छतरपुर स्टेशन मास्टर ने 108 की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, बीमार बुजुर्ग के साथ कोई परिजन न होने से मेल वार्ड में तैनात डॉक्टर और स्टाफ ने इलाज ही नहीं दिया। लगातार इलाज में लापरवाही बरतने के कारण आखिरकार मंगलवार की सुबह 11 बजे बीमार बुजुर्ग ने वार्ड के बाहर ही दम तोड़ दिया। मौत के बाद भी स्टॉफ ने शव के साथ भी अमानवीयता बरती और सुबह से शाम छह बजे तक शव बिना ढंके ही लावारिस हालत में पड़ा रहा। भास्कर रिपोर्टर ने जब वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर जानकारी दी, तब स्वीपरों ने शव को उठाकर मर्चुरी में रखवाया। जब शव को स्वीपरों ने उठाया, तब तक शव में कीड़े पड़ चुके थे।

क्या थी शव स्थिति 

जब अस्पताल के बाहर गैलरी में पड़े बुजुर्ग के शव को स्वीपरों ने उठाया, तब उसके नीचे हजारों कीड़े थे। कई दिनों से बीमार बुजुर्ग की साफ-सफाई नहीं हुई थी, मलमूत्र भी कपड़ों में जमा हो गया था, इस कारण पूरे बदन में कीड़े हो गए थे। बुजुर्ग के शरीर पर किसी भी तरह के ड्रिप चढ़ाने के निशान नहीं थे, न ही सुई लगाए जाने के निशान थे, आसपास किसी भी तरह की दवाईयां भी मौजूद नहीं थीं। आसपास खराब खाना जरूर पड़ा था, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कई दिनों से बुजुर्ग ने कोई खाना नहीं खाया था। बिस्तर पर चादर भी मैला कुचला खराब पड़ा था, जो कई दिनों से नहीं बदला गया था।

और इन कर्मचारियों की भी सुनिए : एक-दूसरे पर आरोप लगाकर कर रहे खानापूर्ति

इमरजेंसी में तैनात डॉ. विनीत पटैरिया ने बताया कि उन्हें दोपहर 2 बजे के लगभग मेल वार्ड से सूचना आई थी, तब बुजुर्ग को मैंने मृत घोषित करके तहरीर  भेज दी थी। वहीं मेल वार्ड में तैनात नर्सों ने बताया कि सुबह की शिफ्ट में मोनिका सिंह की ड्यूटी थी, जिनका काम डॉक्टरों को सूचित करना था। वहीं पुलिस चौकी स्टॉफ ने बताया कि उन्हें शाम सवा चार बजे सूचना मिली थी, कोई वार्ड ब्यॉय शव को नीचे नहीं ला रहा था। दो घंटे बाद स्वीपर शव को नीचे लेकर आए। प्रथम दृष्टया मेल वार्ड की दोनों शिफ्टों में तैनात स्टॉफ की लापरवाही सामने आ रही है, जिनके समक्ष शव यूं ही लावारिस हालत में पड़ा रहा और किसी ने भी शव को ढंकने तक की जहमत तक नहीं की। 

मरीज बोले- नहीं हुआ इलाज 

मेल वार्ड में भर्ती मरीज हरि यादव, गनपत कुशवाहा ने बताया कि हम भी तीन दिनों से भर्ती हैं। हमने कभी इस मरीज को बोतल या इंजेेक्शन लगते हुए नहीं देखा। वहीं एक स्वीपर ने बताया कि मेल वार्ड में तैनात वार्ड ब्यॉय कभी मरीजों की सफाई नहीं करते है, डॉक्टर नर्स कोई इलाज नहीं देते हैं। इस कारण मरीज पड़े पड़े मर जाते है। 

आरएमओ ने जांच की शुरू 

सिविल सर्जन के आदेश पर आरएमओ ने शव का मुआयना किया और मर्चुरी में रखवाया। वहीं मेल वार्ड में तैनात स्टाफ से पूरे मामले की जानकारी लेकर जांच शुरू की है। अस्पताल चौकी पुलिस ने भी सिविललाइन पुलिस को सूचना तहरीर भेज दी। पुलिस ही शव का पीएम करायेगी। 

इनका कहना है

आरएमओ को जांच करने के निर्देश दिए हैं, सुबह दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना का बेहद दुख है। जो डॉक्टर मेल वार्ड में तैनात थे, उन्हें भी नोटिस जारी किया जाएगा। मरीज की केस हिस्ट्री का भी मिलान किया जाएगा। 
-डॉ. आरएस त्रिपाठी, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।