दैनिक भास्कर हिंदी: किसान ऋण फर्जीवाड़े पर एफआईआर के आदेश, समिति प्रबंधक के खिलाफ मामला दर्ज 

June 27th, 2019

डिजिटल डेस्क,सिंगरौली(वैढन)। किसान ऋण फर्जीवाड़े पर डिप्टी कलेक्टर ने तत्कालीन समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई प्रस्तावित की है। डिप्टी कलेक्टर संजय जैन ने जांच में पाया कि तत्कालीन समिति प्रबंधक किशोर सिंह ने रिकार्डों में हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की है। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया है कि समिति प्रबंधक ने किसानों के नाम पर फर्जी ऋण स्वीकृत कर सरकारी रकम की बंदरबांट की है। जबकि किसानों का कहना है कि उन्होंने कभी कर्ज नहीं लिया है। समिति के लेजर में फर्जी ऋण स्वीकृत होने पर डिप्टी कलेक्टर ने प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। दरअसल पंचायतों में कर्जमाफी की सूची चस्पा होने के बाद किसानों ने उनके नाम पर फर्जी ऋण स्वीकृत होने की कलेक्टर से शिकायत की थी। कलेक्टर ने किसानों की शिकायत पर डिप्टी कलेक्टर को जांच सौंपी थी।

ऋण लिये बगैर किसान कर्जदार

डिप्टी कलेक्टर की जांच से यह बात सामने आई है कि हर्रवाह, मकरोहर, जोगियनी, बसौड़ा में ऋण लिये बगैर समितियों ने किसानों को कर्जदार बना दिया है। किसानों के बयान से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि समिति प्रबंधकों ने फर्जी ऋण के प्रकरण स्वीकृत करने अपने करीबी के खाते में पैसा ट्रांसफर कर सरकारी रकम का गोलमाल किया है। मकरोहर समिति के लेजर की जांच में यह पाया गया है कि बड़े पैमाने पर फर्जी लोन के प्रकरण तैयार कर समिति प्रबंधक ने लाखों का गबन किया है।
 

रिकार्ड जब्त करने के निर्देश 

डिप्टी कलेक्टर ने कलेक्टर को जांच रिपोर्ट सौंपते हुए मकरोहर समिति ऋणमाफी के प्रकरणों की जांच के समिति के गठन करने करने की अनुशंसा की है। जांच अधिकारी ने कहा कि ऋणमाफी योजना की आड़ में समिति फजीवाड़े पर पर्दा डालने की कोशिश में जुट गई है। उन्होंने सहकारी उपायुक्त को समिति के रिकार्ड जब्त कर विस्तृत जांच करने की कार्रवाई प्रस्तावित की है। डिप्टी कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट में आशंका जाहिर की ऋणमाफी योजना का इस्तेमाल कर समिति फर्जी लोन के मामलों को दबाने का प्रयास कर रही है।

कार्रवाई को शिथिल करने का प्रयास

जांच अधिकारी द्वारा रिपोर्ट सौंपने के 5 दिन बाद भी समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है। बताया जाता है कि सहकारिता उपायुक्त ने  समिति का लेजर जब्त नहीं है। समिति का रिकार्ड जब्त नहीं होने के कारण पुलिस ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया है। सहकारिता विभाग अफसरों का कहना है कि जांच डिप्टी कलेक्टर द्वारा की गई है तो उन्हें ही रिकार्ड जब्त करना चाहिये था। समिति के रिकार्ड जब्त करने के संबंध में उन्हें डिप्टी कलेक्टर का पत्र नहीं मिला है। यदि प्रशासन द्वारा निर्देश दिये जाते है तो समिति का वर्ष 2007 का लेजर जब्त किया जायेगा। इसके चलते अफसरों पर सहकारिता माफियाओं को संरक्षण देने और कार्रवाई को शिथिल करने के गंभीर आरोप लगने लगे है। जानकारों का कहना है कि सहकारिता विभाग के अफसरों के संरक्षण के चलते समितियों के खिलाफ आरोप-प्रमाणित पाये जाने के बाद भी 5 मामलो में एक साल बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है।

ऋण चुकाने के बाद भी सूची में नाम

जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुंची शिकायत की जांच में यह बात सामने आई है कि ऋण चुकाने के बाद भी 6 किसानों का नाम जय किसान माफी योजना के तहत सूची में है। डिप्टी कलेक्टर की जांच में यह भी पाया गया है कि 37 किसानों के द्वारा कर्ज नहीं लेने के बाद भी उनका नाम ऋण माफी की सूची चस्पा होने से सामने आया है। हैरत की बात तो यह कि समिति ने 13 किसान ऐसे है जिनके पास जमीन नहीं होने के बाद भी समिति ने उन्हें कर्जदार बना दिया है। किसानों के बयान और पंचनामा तैयार डिप्टी कलेक्टर ने रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी है।

इनका कहना 

मकरोहर समिति के वर्ष 2007 के लेजर की जांच में बड़े पैमाने पर फर्जी ऋण स्वीकृत कर वित्तीय अनियमितता की गई है। तत्कालीन समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिये जांच रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है। सहकारिता उपायुक्त को समिति का लेजर जब्त कर डिटेल जांच करने के लिये कहा गया है।
- संजय जैन, डिप्टी कलेक्टर

समिति का लेजर जब्त करने और विस्तृत जांच करने का पत्र नहीं मिला है। जांच रिपोर्ट के साथ रिकार्ड नहीं होने के कारण पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया है।
- पीके मिश्रा, उपायुक्त, सहकारिता

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