दैनिक भास्कर हिंदी: फ्लाई ऐश का इस्तेमाल वेकोलि के बंद खदानों के लिए होगा

March 5th, 2021

डिजिटल डेस्क, चंद्रपुर। प्रदूषण के लिए बदनाम शहरों में चंद्रपुर का जिक्र हमेशा होता है। यहां की जलवायु में घुल रहे फ्लाई ऐश और उसके जहरीले तत्वों की रोकथाम के लिए सरकार ने समय-समय पर कई गाइडलाइन जारी की हैं लेकिन पूरी तरह सफलता नहीं मिल सकी। अब केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) की बंद पड़ीं कोयला खदानों को इस फ्लाई ऐश से पाटने की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रायोगिक तौर पर जिले की भद्रावती तहसील के तेलवासा, ढोरवासा, न्यू कुनाला की बंद पड़ीं खुली खदान (ओपनकास्ट) को पाटने के लिए चंद्रपुर सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन (सीएसटीपीएस) की 5 करोड़ टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जाएगा। इससे जहां वेकोलि को रेत खरीदने से मुक्ति मिलेगी, वहीं सीएसटीपीएस को 20 साल तक उसके प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश के रख-रखाव से छुटकारा मिलेगा। फ्लाई ऐश के निपटारे के लिए सबसे पहले ओडिशा के तालचेर पॉवर प्लांट परिसर में मौजूद बंद खानों को इससे पाटा गया था। अब यह प्रयोग चंद्रपुर जिले में किया जाएगा। 

फ्लाई ऐश एक बारीक पाउडर है, जो पॉवर प्लांट में जलाए जाने वाले कोयले से बनता है। इसमें भारी धातु, ब्लैक कार्बन और पार्टिकुलर मैटर (पीएम) 2.5 भी होते हैं। पीएम 2.5 हवा के माध्यम से उड़कर 20 किलोमीटर तक फैल जाता है। यह पानी और अन्य सतहों पर जम जाता है। फ्लाई ऐश में सिलिका, एल्यूमीनियम, कैल्शियम ऑक्साइड, आर्सेनिक, बोरॉन, क्रोमियम और सीसा जैसे तत्व भी पाए जाते हैं। यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। अब तक फ्लाई ऐश की 100 प्रतिशत उपयोगिता नहीं हो पाने से यह हवा-पानी में घुलकर उन्हें विषैला बना देती है। हालांकि, सीमेंट व ईंट उद्योग में यह इस्तेमाल की जा रही है लेकिन यह उपयोगिता 50 प्रतिशत से भी कम है। 

बीते कई सालों से इस योजना को साकार करने के प्रयास जारी हैं। अब जाकर सफलता मिली है। जल्द ही इसे वेकोलि की सहायता से शुरू किया जाएगा। 
- प्रा. सुरेश चोपणे, पर्यावरणवादी व अध्यक्ष, ग्रीन प्लैनेट सोसायटी, चंद्रपुर

पाइप लाइन बिछाकर खदानों तक पहुंचाया जाएगा 
सीएसटीपीएस, वेकोलि के खदानों को पाटने के लिए मुफ्त फ्लाई ऐश देगा। तेलवासा, ढोरवासा व न्यू कुनाला की बंद पड़ीं ओपनकास्ट के लिए प्लांट से सीधे 30 किमी की पाइप लाइन बिछाई जाएगी अथवा छोटा नागपुर के ऐश बंड से 25 किमी दूरी तक पाइप बिछाकर इन्हीं बंद खानों का पानी लिया जाएगा। उस पानी में फ्लाई ऐश घोलकर वापिस इसे खान पहुंचाया जाएगा। जहां इसका उपयोग उन्हें पाटने में होगा। मुंबई स्थित महावितरण के मुख्य कार्यालय को यह प्रस्ताव भेजा चुका है। इस बारे में बीते दिनों वेकोलि के नागपुर मुख्यालय में बैठक भी हो चुकी है।