दैनिक भास्कर हिंदी: कैराना: मुश्किल में भाजपा, निर्दलीय हसन का RLD को समर्थन

May 24th, 2018


डिजिटल डेस्क, कैराना। उत्तर प्रदेश की कैराना संसदीय सीट पर होने वाले उप-चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कंवर हसन ने राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को समर्थन दे दिया है। आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम के खिलाफ उनके देवर कंवर हसन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। कांग्रेस नेता इमराज मसूद कई दिनों से कंवर हसन को समर्थन के लिए मनाने में लगे थे। कंवर हसन के समर्थन देने के बाद कैराना मे लड़ाई सीधी सपा और बीजेपी के बीच हो गई है। बता दें कि कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा सीट पर 28 मई को मतदान होना है, जबकि, मतगणना 31 मई को की जाएगी। 

रुकेगा मुस्लिम मतों का विभाजन 
कैराना में एक तरफ जहां बीजेपी प्रत्याशी चुनाव मैदान हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस, बीएसपी, एसपी और आरएलडी ने समाजवादी पार्टी प्रत्याशी तबस्सुम हसन का समर्थन किया है। समाजवादी पार्टी ने कैराना में राष्ट्रीय लोकदल (आरजेडी) से गठबंधन किया है। समाजवादी पार्टी ने तबस्सुम को अपना प्रत्याशी बनाया है, लेकिन वो RLD के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रही हैं । भाजपा ने दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारा है। जब तक कंवर हसन मैदान में थे, तब तक भाजपा प्रत्याशी की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी, क्योंकि उनकी मौजूदगी में मुस्लिम मतों का विभाजन तय था। अब जबकि वह मुकाबले से हट गए हैं, तो इस सीट पर सियासी गणित भी एकदम से बदल गया है। 

भाजपा की कठिनाई 
कैराना सीट पर कंवर हसन भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में थे। वह तबस्सुम के देवर हैं। यह स्थिति भाजपा के लिए राहत भरी थी, क्योंकि एक ही परिवार से दो लोगों के उतरने से मुस्लिम मतदाताओं के बीच होने वाले बटवारे का फायदा भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को मिलना तय था। कवर के पिता कैराना में चेयरमैन हैं और उनका स्थानीय मुस्लिम समाज में अच्छा-खासा प्रभाव भी है। अनुमान लगाया जा रहा था कि वह 20 से 30 हजार के आसपास मुस्लिम वोट आसानी से काटेंगे। बीजेपी मान कर चल रही थी कि मुस्लिम मतों का विभाजन अंततः उसकी प्रत्याशी को फायदा देगा। अब कंवर के आरएलडी प्रत्याशी को समर्थन देने से बीजेपी के लिए स्थिति आसान नहीं रह गई है। गुरुवार को आरएलडी नेता जयंत चौधरी कंवर हसन के घर पहुंचे। जहां उन्होंने तबस्सुम को समर्थन देने की घोषणा की। 

क्या कहते हैं सियासी पंडित 
2014 और 2017 के चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को एकतरफा जीत मिली थी। गोरखपुर और फूलपुर के उप-चुनावों के बाद अब सबकी नजरें कैराना उप-चुनाव पर लग गई हैं। इस सीट पर मुस्लिम और जाट मतदाता ही निर्णायक साबित होते आए हैं। सपा का इस क्षेत्र के मुस्लिम मतदाताओं में अच्छा प्रभाव है। जबकि जाटों के बीच रालोद की अच्छी पैठ है। इन दोनों दलों के बीच गठबंधन होने के बाद सपा प्रत्याशी की स्थिति काफी मजबूत हो गई है। सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन के विरोध में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनके देवर कंवर हसन के चुनाव मैदान में उतरने से मुस्लिम मतों का विभाजन तय था। कंवर हसन ने चारो ओर से पड़ रहे दबाव के आगे झुकते हुए भाभी तबस्सुम हसन को समर्थन दे दिया। कैराना के सियासी मैदान में आया यह ट्विस्ट भाजपा के लिए तकलीफदेह साबित हो सकता है। यह सीट योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के लिए विशेष रूप से प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है, क्योंकि भाजपा को पिछले दिनों ही गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा था। योगी पराजय के इस सिलसिले को इस सीट पर जरूर तोड़ना चाहेंगे। 

सपा ने यूपी को अराजकता में ढकेला 
योगी आदित्यनाथ ने आज यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सपा के शासनकाल में राज्य पूरी तरह अराजकता की स्थिति में जा पहुंचा था। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था, आर्थिक विकास, उद्योग-धंधे और रोजगार सृजन सभी मोर्चों पर राज्य सरकार का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। सपा सरकार ने अपने कार्यकाल में सरकारी नौकरियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं हैं। इसकी तुलना में बीजेपी शासनकाल में कानून का राज्य स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के हाथ पश्चिमी उत्तर के लोगों के खून से रंगे हुए हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की जनता अब सपा और अन्य दलों की प्राथमिकताओं को अच्छी तरह समझ चुकी है। यही वजह है कि उसने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है।