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रोजगार मेले में बेरोजगारों के साथ मजाक -टेंट न पानी, हेल्प डेक्स भी नदारद

रोजगार मेले में बेरोजगारों के साथ मजाक -टेंट न पानी, हेल्प डेक्स भी नदारद

डिजिटल डेस्क सिंगरौली(वैढऩ)। कलेक्ट्रेट में आयोजित रोजगार मेले में अफसरों की लापरवाही से बेरोजगारों की जमकर फजीहत हुई। रोजगार की आस लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे अभ्यर्थियों को पानी तक नसीब नहीं हुआ। जिला रोजगार कार्यालय की अराजकता के चलते धूप में छात्रा और छात्राओं हेल्प डेक्स तो दूर की बात अफसरों ने टेंट तक लगाना मुनासिब नहीं समझा। इसके चलते सुबह 10 बजे से रोजगार कार्यालय पहुंचे अभ्यर्थी जानकारी जुटाने के लिये इधर से उधर भटकते हुये नजर आये। बताया जाता है कि रोजगार मेले की आड़ में अफसरों ने छोटी-छोटी कंपनियों को बुलाकर बेरोजगारों के साथ मजाक किया है। रोजगार की तलाश में हजारों की संख्या में पहुंचे बेरोजगार टोकन लेकर देर शाम तक अपने नंबर का इंतजार करते नजर आये। बेरोजगारों का कहना है कि जिला रोजगार कार्यालय द्वारा टेंट और पानी का इंतजाम नहीं करने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा है।
6 घंटे में 400 के इंटरव्यू 
रोजगार के लिये यहां पहुंचे एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों में सिर्फ 400 का ही मंगलवार को इंटरव्यू हो पाया है। बताया जाता है कि देर शाम तक टोकन लेकर बैठे 500 सौ से अधिक अभ्यर्थी बैरंग लौट गये हंै। जानकारों का कहना है कि रोजगार मेले में सिर्फ 6 कंपनियों के यहां पहुंचने के कारण अधिकांश अभ्यर्थी खाली हाथ वापस लौट गये। यहां इंटरव्यू देने के लिये आये अभ्यर्थियों को कहना है कि 6 घंटे के अंदर 400 बेरोजगारों का साक्षात्कार लेने की बात किसी के गले नहीं उतर रही है।
सिर्फ 30 के चयन का दावा
मेले में अव्यवस्था के सवाल पर रोजगार अधिकारी संजीव सिंह का कहना है कि उन्हें इतनी संख्या में अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के लिये आने की उम्मीद नहीं थी। इसके चलते टेंट की व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हुये साक्षात्कार में आईटीई ट्रेड के 30 अभ्यर्थियों का इंदौर और पुणे की कंपनियों के लिये चयन हुआ है। जिला रोजगार अधिकारी ने मेले में आई कंपनियों में अभ्यर्थियों के चयन के सवाल पर अभिज्ञता जाहिर की है। कलेक्ट्रेट परिसर में खुलेआम बेरोजगारों के साथ जारी मजाक के बाद भी मेले की अव्यवस्था पर अफसरों की नजर नहीं पड़ पाई।
भटकती रहीं छात्राएं
रोजगार की तलाश में मेले में पहुंची कई छात्राएं यहां से वहां भटकती हुई नजर आईं। छात्राओं का कहना है कि रोजगार कार्यालय के अधिकारियों द्वारा व्यवस्था नहीं करने की वजह उन्हें फार्म भरने से लेकर इंटरव्यू में सहायता नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू के लिये उचित स्थान का चयन नहीं करने से जिलेभर से आये अभ्यर्थियों को जमकर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।