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मरीजों के साथ मनमारी कर रहे एंबुलेंस चालक, वसूल रहे ज्यादा किराया

मरीजों के साथ मनमारी कर रहे एंबुलेंस चालक, वसूल रहे ज्यादा किराया

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा।  सड़कों पर यात्री वाहन नहीं चल रहे हैं, टैक्सी तो दूर आटो भी नहीं मिल रहे हैं। लॉक डाउन के दौरान यातायात व्यवस्था बंद है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी अस्पताल तक आने वाले गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को उठानी पड़ रही है। हालात यह है जिला अस्पताल में संचालित निजी एंबुलेंस संचालक महानगरों में चलने वाली ओला और उबेर की टैक्सियों से ज्यादा किराया वसूल रहे हैं। मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर एंबुलेंस संचालक लगभग 40 रुपए प्रति किमी किराया ले रहे हैं।

इसी तरह का एक मामला शनिवार दोपहर को सामने आया। एक मरीज जिसे 45 किलोमीटर दूर कपुर्दा जाना था। परिजन काफी देर तक वाहन की व्यवस्था में जुटे रहे। लॉकडाउन की वजह से कपुर्दा के लिए कोई वाहन नहीं मिला। जब मरीज के परिजन एंबुलेंस चालक के पास पहुंचे तो चालक ने 45 किलोमीटर जाने के 22 सौ रुपए किराया मांगा। मरीज के परिजनों ने काफी देर तक मिन्नतें की। तब कहीं एंबुलेंस चालक 14 सौ रुपए किराए पर जाने को तैयार हुआ। ऐसे हालात अस्पताल परिसर में लगभग रोजाना देखने को मिल रहे हैं

शहरी सीमा में पांच से सात सौ रुपए किराया:

अस्पताल से शहरी सीमा तक मरीज को छोड़ने का किराया पांच से सात सौ रुपए वसूला जा रहा है। लॉकडाउन का फायदा उठा रहे एंबुलेंस चालकों की यह मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। इस सबके बीच ऐसे मरीज जो आर्थिक रुप से काफी कमजोर है। उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

नोटिस के बाद भी परिसर में खड़ी हो रही एम्बुलेंस:

चौबीस घंटे अस्पताल परिसर में एंबुलेंस चालक का जमावड़ा होता है।  प्रबंधन ने कई बार नोटिस जारी कर निजी एंबुलेंस चालकों को परिसर में वाहन खड़ा न करने की हिदायत दी है। केवल अस्पताल परिसर ही नहीं पशु अस्पताल और कोतवाली थाना के बीच सड़क पर एंबुलेंस वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। इससे पाटनी टाकीज रोड और बुधवारी बाजार जाने वाले लोगों को परेशानी होती है।

आखिर क्यों नहीं बनी किराया सूची:

जिला अस्पताल में परिजन का इलाज कराने आए चारगांव निवासी जितेंद्र पटेल ने कहा कि मरीजों से एंबुलेस संचालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने का कारोबार सालों से जारी है। ये बात अलग है कि अभी कुछ ज्यादा ही किराया वसूला जा रहा है। जिन वाहनों को एंबुलेंस की अनुमति दी जाती है, उनका आरटीओ से किराया निर्धारित होना चाहिए। गरीब परिवारों के मरीजों का गांव तक लौटने के लिए मुफ्त वाहन सुविधा मिलनी चाहिए।
 

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