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मेसर्स रॉयल कांसट्रक्शन को एनसीएल ने किया ब्लैक लिस्ट

मेसर्स रॉयल कांसट्रक्शन को एनसीएल ने किया ब्लैक लिस्ट

डिजिटल डेस्क  सिंगरौली (मोरवा)। एनसीएल अधिकारियों से सांठ-गांठ कर सिविल और स्पेयर्स की आपूर्ति में करोड़ों के  टेंडर मैनेज करने वाली फर्म को एनसीएल ने एक वर्ष के लिए डिबार कर दिया है। बीते दिनों मेसर्स रॉयल कांसट्रक्शन को एनसीएल ने ब्लैक लिस्ट कर दिया है। फर्म के मालिक रवि शंकर सिंह लक्ष्मी मार्केट जयंत जिला सिंगरौली को एनसीएल की सभी परियोजनाओं और इकाइयों में एक वर्ष की अवधि तक कार्य नहीं कर सकेंगे। तत्काल प्रभाव से जारी किये गये आदेश में एनसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधक कार्मिक चाल्र्स जुस्टर ने आदेश जारी किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई आयकर विभाग के द्वारा की गई छापेमारी में जब्त एनसीएल में भुगतान के लिए प्रोसीड होने वाली फाइल ठेकेदार के घर में मिली थी। जिस पर आयकर विभाग ने एनसीएल प्रबंधन से यह पूछा था कि ऐसा कैसे संभव है कि कार्यालय की फाइल ठेकेदार स्वयं रखता हो? उस पर कम्पनी ने कार्यालय से फाइल चोरी होने का हवाला दिया था। हालांकि एनसीएल प्रबंधन ने इस मामले पर ठेकेदार से संबंधित कार्यों के लिए एनसीएल के अमलोरी, निगाही, जयंत और खडिय़ा प्रोजेक्ट के महाप्रबंधकों को शोकॉज नोटिस जारी किया था। जिसमें पूछा गया था कि आधिकारिक कागजात और दस्तावेज संविदाकार के आफिस या उसकी परमाइसेस से कैसे मिले हैं? इससे पहले संविदाकार से भी यह पूछा गया तो जवाब संतोषजनक नहीं मिला था। जिस पर संबंधित महाप्रबंधकों ने संविदाकार और फर्म पर एक्शन लिये जाने की की बात कही थी। एनसीएल के उच्च और सक्षम अधिकारी के द्वारा ठेकेदार व संबंधित महाप्रबंधकों के मामले के तथ्यों, दिये गये जवाब और तर्कों को संज्ञान में लेते हुए फर्म को एक वर्ष के लिए बैन कर दिया है। 
एक अन्य फर्म पर भी हुई कार्रवाई
सूत्रों की मानें तो एनसीएल के सब स्टेशन, इलेक्ट्रिकल और हाईटेंशन लाइनों को शिफ्ट करने जैसे कार्यों को करने वाली फर्म संदीप एंड कम्पनी व उसके मालिक संदीप चोपड़ा पर भी एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। दोनो ही फर्मो पर एक ही प्रकार के मामले बताए जा रहे हैं। ठेकेदारों पर हुई ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई से एनसीएल में कार्य करने वाले ठेकेदारों में हड़कम्प मचा हुआ है। हालांकि इन दोनों फर्मो के द्वारा पूर्व में आवंटित कार्य अभी भी किये जा रहे हैं लेकिन उन्हें नये कार्यों में एक वर्ष तक सहभागिता करने की अनुमति नहीं होगी।
अधिकारियों को बचाने की चर्चा
सूत्र बताते हैं कि ठेकेदारों ने एनसीएल के अधिकारियों को बचाने के लिए यह सजा अपनी मर्जी से स्वीकार की है। जिससे कि संबंधित अधिकारियों को बचाया जा सके। वर्ना जिस प्रकार एनसीएल के परियोजना और मुख्यालय के कार्यालय में मौजूद होने वाले कागजात आयकर विभाग ने ठेकेदारों के कब्जे से दो वर्ष पहले अचानक छापेमारी कर जब्त किये थे। उसकी लपेट में एनसाएल के बड़े अधिकारी भी आ सकते थे। एनसीएल में करोड़ों का व्यवसाय करने वाले ठेकेदार टेंडर डालने से पहले ही काम मिलने या न मिलने की जुगत लगा लेते हैं। अपनी पहुंच और सेवा शर्तों पर अधिकारियों से हर काम कराने में सफल हो जाते हैं। जिसकी बानगी दो दशक से जयंत में अवैध रूप से एनसीएल की जमीन पर लम्बा चौड़ा ठेकेदार का कैम्प आज भी आबाद है।

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