तस्करी की कोशिश नाकाम,पकड़े गए पिता-पुत्र: 5 लाख में पन्ना में हुआ था पेंगोलिन का सौदा

May 9th, 2022

डिजिटल डेस्क सतना। वन मंडल के उडऩदस्ते ने छापामार कार्रवाई करते हुए सोमवार को संकटग्रस्त पेंगोलिन की तस्करी की कोशिश नाकाम कर दी। तस्करी के आरोप में पिता-पुत्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उप वन मंडलाधिकारी डा. लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि मुखबिर से डीएफओ विपिन पटेल को खबर मिली थी कि पेंगोलिन को पन्ना में 5 लाख में बेचने की कोशिश हो रही है। खबर की तस्दीक के बाद सर्च कार्रवाई की गई तो सच सामने आ गया। उचेहरा थाना इलाके के बर्रे निवासी  दशरथ सिंह और उसके बेटे अनूप सिंह के पास से एक अदद पेंगोलिन बरामद किया गया है। पूछताछ की जा रही है। बरामद पेंगोलिन को चेकअप और ट्रीटमेंट के लिए मुकुंदपुर स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है।
पटिहट के जंगल से लाए थे पकड़ कर:---
बताया गया है कि बर्रे निवासी आरोपी दशरथ सिंह पिता जीवन सिंह और उसका बेटा अनूप सिंह एक मादा पेंगोलिन के साथ उसके बच्चे को पटिहट सर्किल के कंम्पार्टमेंट नंबर पी -444 से पकड़ कर लाए थे। बच्चा मर गया तो उसे दफना दिया। बचे पेंगोलिन को बेचने के लिए पिता-पुत्र में पन्ना के तस्करों से संपर्क साधने की कोशिश की थी। इसी बीच इस कोशिश की भनक डीएफओ विपिन पटेल को
सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे लगी। डीएफओ ने सतना एसडीओ डा.लाल सुधाकर सिंह को सर्च वारंट जारी कराया और आनन फानन में उडऩदस्ता दल के प्रभारी दिग्विजय सिंह को सर्च कार्रवाई के निर्देश दिए। उडऩदल के बैकअप के लिए मैहर के रेंजर सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में भी एक टीम मौके पर भेजी गई। सर्चिंग के दौरान आरोपी  दशरथ सिंह और अनूप सिंह घर से ही हिरासत में ले लिए गए। घर से पेंगोलिन भी बरामद कर लिया गया।
 संकट ग्रस्त है सल्लू सांप :--
स्तनधारी इस वन्यप्राणी को स्थानीय बोली में सल्लू सांप या फिर चींटीखोर भी कहते हैं। जिले के चित्रकूट, मझगवां और उचेहरा के जंगलों में यह संकटग्रस्त वन्य प्राणी पाया जाता है। शिकार की वजह से दुर्लभ होते जा रहे पेंगोलिन शेड्यूल-वन में शामिल हैं। आईयूसीएन (इंटर नेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुल वन्य प्राणियों की तस्करी में अकेले 20 फीसदी पेंगोलिन होते हैं।
चाइना में सबसे ज्यादा मांग :----
जानकारों ने बताया कि चाइना में पेंगोलिन की सबसे ज्यादा मांग है। विश्व बाजार में इसके ऊंचे दाम मिलते हैं। यही वजह है कि सल्लू सांप तकरीबन दुर्लभ होकर रह गया है। कहते हैं, केराटिन से बने इसके शल्क (स्केल्स) से चीन में सेक्स पावर जैसी ट्रेडिशनल मेडिसिन तैयार की जाती हैं। सांप-बिच्छू, मकड़ी, छिपकली और कॉक्रोच की खाल की तरह चीन में पेंगोलेन के शल्क से भी महंगी दवाएं बनाई जाती हैं। चाइनीज पेंगोलिन का मांस खाते हैं और इसके शल्क का सूप भी पीते हैं।