दैनिक भास्कर हिंदी: सिंगरौली में मिली कल्चुरीकालीन भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा, ब्राम्ही लिपी के अवशेष

March 26th, 2019

डिजिटल डेस्क, सिंगरौली (वैढ़न)। सिंगरौली में कल्चुरीकालीन भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा मिली है और इसी के साथ यह नगरी पुरातत्व विभाग के नक्शे पर काफी महत्वपूर्ण हो गई है। यहां चल रही खुदाई के दौरान एक ईंट पर ब्राम्ही लिपी के अवशेष भी मिले हैं। यह भी काफी दुर्लभ है, जिसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।  

यह बात सामने आयी है पुरातत्व विभाग के एक सर्वेक्षण में जो कि माड़ा के नगवां क्षेत्र में पिछले साल से चल रहा है और हाल ही में इस सर्वेक्षण का एक पार्ट टीम ने पूर्ण कर लिया है। टीम को इस प्राचीन नगरी के 7वीं-8वीं शताब्दी के कल्चुरीकाल के होने के कई अहम अवशेष मिले हैं और इसी के आधार पर पुरातत्व की टीम इसकी पुष्टि भी कर रही है। इन प्राचीन अवशेषों में मकान से लेकर भगवान विष्णु, शिव सहित अन्य देवी-देवताओं के करीब 4-5 मंदिरों के अवशेष टीम को मिले हैं। वैसे मंदिरों में अभी तक मात्र विष्णु मंदिर के कुछ हिस्सों की खुदाई का कार्य हो पाया है और इतने में सफेद सेंडस्टोन से बना गर्भगृह और विष्णु मूर्ति के पांव का कटा हुआ हिस्सा मिला है, लेकिन इसके अलावा टीम के हाथ मंदिर के अवशेष में एक ऐसी ईंट (वेललेवीगेटेड क्ले) मिली है, जिसमें एक अदुभुत चित्र है। इस चित्र में खोपड़ी पर टोपी व कोट जैसा पहनावा है जो कि उस समय की भारतीय पोशाक से मेल नहीं खाती है और यह पोशाक पश्चिम एशिया से अरबियन व पारसी रीजन से काफी हद तक मेल खाती है। जिसके आधार पर कहा जा रहा है कि इस प्राचीन मंदिर में कोई विदेशी आया था।

गौरतलब है कि कल्चुरीकाल की इस अहम खोज की शुरूआत सालभर पहले अगस्त 2018 के दौरान ही सामने आ गई थी। जब नगवां के स्थानीय लोगों को एक अद्भुत मूर्ति मिली थी और उस समय यह संशय बना हुआ था कि यह मूर्ति किसकी है। इसके बाद नगवां में पुरातत्व की टीम पहुंची थी और उसने सर्वे का कार्य शुरू किया था। जिसके बाद पता चला था यह मूर्ति भगवान विष्णु की है, लेकिन इस मूर्ति में भगवान विष्णु की अन्य मूर्तियों के मुकाबले काफी अलग है। जिससे इसे खास माना जा रहा है।

बहुत कम मिलते हैं नगरों के अवशेष
नगवां की इस खोज को लेकर पुरातत्व विभाग की टीम भी खासी उत्साहित है। क्योंकि यहां कल्चुरीकालीन, गुप्तकालीन सभ्यता से लेकर प्रथम-द्वितीय ईस्वी के प्राचीन नगर समेत अन्य कई अवशेष एक साथ मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि देश में ऐसे प्राचीन काल के इक्का-दुक्का अवशेष तो मिल जाते हैं, लेकिन प्राचीन नगर काफी कम मिल पाते हैं। जिससे माड़ा के नगवां में मिली यह प्राचीन नगरी अपने आप में अनोखी है।

मंदिर की दीवार में चुने गए थे हथियार
प्राचीन नगरी में के दोनों मंदिरों में गर्भगृह व अर्धमंडप भी मिला है। विष्णु मंदिर की दीवारों में बीच-बीच में हथियार रखे जाने के सुराग भी टीम को मिले हैं। साथ ही ऐसे सुराग भी पाए गए हैं, जिससे कहा जा रहा है कि प्राचीन लोग इन मंदिरों में रखकर हथियारों की पूजा भी किया करते थे।

यहां मिले हैं बाम्ही लिपि के दो अक्षर
पुरातत्व की टीम को प्राचीन नगरी में मिले मंदिरों से करीब 1 किमी. दूरी पर दो गुफा के दो द्वार मिले हैं। जिनके द्वार पर सप्तम-अष्टम सदी के लेख मिले हैं। गुफा के करीब 700-800 मीटर नीचे खुदाई में भी मंदिर के अवशेष और कमरे भी मिले हैं, जिनका उपयोग उस समय लोग रहने के लिए करते होंगे। ये सभी अवशेष तो चौथी से 6वीं शताब्दी के लग रहे हैं। यहीं पर मिले मंदिर के अवशेष में से एक ईंट पर ब्राम्ही लिपि में र, ला अक्षर लिखा मिला है, जो कि प्रथम-द्वितीय ईस्वी के हो सकते हैं।

क्या है ब्राम्ही लिपि
ब्राह्मी एक प्राचीन लिपि है जिससे कई एशियाई लिपियों का विकास हुआ है। देवनागरी सहित अन्य दक्षिण एशियाई, दक्षिण-पूर्व एशियाई, तिब्बती तथा कुछ लोगों के अनुसार कोरियाई लिपि का विकास भी इसी से हुआ था। ब्राह्मी लिपि बांये से दाएं की ओर लिखी जाती है। यह मात्रात्मक लिपि है। व्यंजनों पर मात्रा लगाकर लिखी जाती है। कुछ व्यंजनों के संयुक्त होने पर उनके लिये संयुक्ताक्षर का प्रयोग वर्णों का क्रम वही है जो आधुनिक भारतीय लिपियों में है।