दैनिक भास्कर हिंदी: मण्डी में किसान की मौत पर हंगामा, एक करोड़ मुआवजा की मांग पर अड़े किसान

May 26th, 2018

डिजिटल डेस्क रीवा । भावान्तर योजना के अंतर्गत चना बेचने कृषि उपज मण्डी आए किसान की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई । किासन की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित लोगों ने खरीदी बंद कराने के साथ ही मण्डी के गेट पर ताला जड़ दिया।  जिले के रायपुर कर्चुलियान थाना क्षेत्र अंतर्गत गोरगांव गांव से कृषक सुरेन्द्र कुमार पटेल पुत्र उग्रभान 18 वर्ष शुक्रवार को पिकअप वाहन से चना लेकर कृषि उपज मण्डी करहिया आया था  लेकिन उसके चना की खरीदी नहीं हो पाई और वह रात में मण्डी में ही रूक गया। बताते है कि गर्मी की वजह से वह अनाज शेड के समीप खुले आसमान के नीचे रात में सो रहा था। इसी दौरान एक ट्रक की चपेट में आ गया। किसान की मौके पर ही मौत हो गई।  मृतक का शव रात में ही अस्पताल भेज दिया गया था। परिजन का इस बात को लेकर भी आक्रोश रहा कि उनके आने से पहले आखिर शव को यहां से क्यों हटाया गया। यहां तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। 

नेताओं का लगा जमावड़ा 
मण्डी में किसान की मौत की घटना के बाद यहां नेताओं का जमावड़ा लगने लगा। किसान नेताओं के साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों के लोग यहां पहुंच गए।  यहां कांग्रेस विधायक सुन्दर लाल तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष  अभय मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष माया सिंह, पूर्व विधायक विद्यावती पटेल, शहर कांगे्रस अध्यक्ष गुरमीत सिंह मंगू, नगर निगम की पूर्व नेता प्रतिपक्ष कविता पाण्डेय, जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह, किसान नेता रविदत्त सिंह, कुंवर सिंह, इन्द्रजीत सिंह शंखू, रामायण पाण्डेय सहित काफी लोग पहुंचे। 

कलेक्टर से चर्चा विफल
किसान की मौत के बाद मण्डी में चल रहे हंगामे के बीच कलेक्टर प्रीति मैथिल यहां पहुंची। कलेक्टर ने कहा कि चार लाख रूपये मुआवजा देने का अधिकार उनके पास है। इसके साथ ही अंत्येष्टि के लिए भी 25 हजार रूपये देने को तैयार हैं। एक करोड़ रूपये और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।  आक्रोशित किसान इस पर तैयार नहीं हुए। किसानों ने कहा कि एक करोड़ मुआवजा दे सरकार मांग पूरी होने पर ही वे पोस्टमार्टम कराएंगे। 

रेस्ट हाउस कभी नहीं खुलता
मण्डियों में किसानों के लिए रेस्ट हाउस बनाए गए हैं। इसकी सुविधा किसानों को नहीं मिल रही है। रात में रेस्ट हाउस बंद रहते हैं। रेस्ट हाउस की सुविधा का सही संचालन न होने की वजह से किसान बाहर ही सोने को मजबूर होते है।  इस घटना के बाद लोगों का आक्रोश मण्डी प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर रहा। किसानों का कहना था कि यदि रेस्ट हाउस खुला होता तो यह किसान बाहर न सोता।