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सिंगरौली - रिलायंस खदान पहुंची डीजीएमएस की टीम, जांच जारी

सिंगरौली - रिलायंस खदान पहुंची डीजीएमएस की टीम, जांच जारी

दुर्घटना की जांच करेगी नवानगर पुलिस, जल्द दर्ज होंगे परिजनों के कथन-खदान प्रबंधन की बेरुखी से स्तब्ध हैं कर्मचारी और हताहतों के परिजन
डिजिटल डेस्क सिंगरौली (वैढऩ) ।
रिलायंस की अमलोरी स्थित कोयला खदान में शनिवार को हुए हादसे में दो कर्मचारियों की मौत के संवेदनशील मामले की जांच शुरू हो गयी है। एक तरफ खदान सुरक्षा के  लिए वैधानिक टीम ने खदान को अपनी निगरानी में ले रखा है तो दूसरी तरफ नवानगर पुलिस ने दुर्घटना के कारणों और उसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति की खोजबीन शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो खदान सुरक्षा निदेशालय (डीजीएमएस) वाराणसी जोन के डिप्टी डायरेक्टर की टीम ने
सोमवार को रिलायंस कोयला खदान के दुर्घटना क्षेत्र में अपनी निगरानी बढ़ा दी है।
 इस दुर्घटना में रिलायंस प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा में हुई चूक से  दो कर्मचारियों की मौत के कारणों की जांच की जा रही है। पूरी तरह से गोपनीय ढंग से चल रही जांच में डीजीएमएस वाराणसी जोन की टीम के द्वारा रिलायंस के अधिकारियों, खदान की सुरक्षा में लगे अधिकारियों, वैधानिक पदों पर कार्य करने वाले अधिकारियों सहित घटना के समय मौजूद लोगों की जानकारी जुटायी जा रही है।  सूत्रों की मानें तो डीडीएमएस माइनिंग ने खदान में हुई दुर्घटना में दो मौतों के लिए प्रथमतया खदान प्रबंधन को सुरक्षा उपायों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही साथ घटना स्थल को जस का तस बनाये रखने के निर्देश दिये हैं। बताया जा रहा है कि खदान के हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी वाले क्षेत्र में चार पहिया कैम्पर का पहुंचना ही अपने आप में बड़ी लापरवाही साबित करता है। इस प्रकार से की जा रही माइनिंग पर डीजीएमएस ने सभी साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए हैं। टीम में शामिल माइनिंग व सेफ्टी से जुड़े तथ्यों को देखा जा रहा है और घटना स्थल का बारीकी से मुआयना किया जा रहा है। फिलहाल घटना स्थल पर किसी के भी आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
पुलिस ने दर्ज किया मर्ग
खदान में हुई दुर्घटना में देवेन्द्र पांडेय और आदेश शाह की मौत के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। इस घटना की जांच संबंधित थाना नवानगर के प्रभारी यूपी सिंह को दी गई है। जिसके लिए श्री सिंह ने तेज तर्रार सब इंस्पेक्टर आरएन मिश्रा को इस मामले की तफ्तीश में लगाया है। बताया जा रहा है कि दुर्घटना करने वाले वाहन के मालिक और उसके चालक पर दोनों पर आरोप पंजीबद्ध करने के लिए विवेचना की जा रही है। दुर्घटना में होलपैक चला रहा चालक भी आरोपी बन सकता है। जिसकी लापरवाही से दो कर्मचारियों की मौत हुई है।
संरक्षा को लेकर कसा जा सकता है शिकंजा
खनन क्षेत्र में सुरक्षा व संरक्षा बहुत अहम मसला है। जिसके तहत किसी भी खदान को चलाने के तौर तरीके संचालित किये जाते हैं और हर खननकर्ता को डीजीएमएस के नियमों का पालन करने की अनिवार्यता होती है। लेकिन निजी खदान होने के कारण खदान  सुरक्षा महज कागजों पर निपटायी जा रही थी। जिसके लिए न तो कम्पनी किसी प्रकार का प्रशिक्षण करा रही थी और न ही व्यावसायिक खदान प्रशिक्षण करा रही थी। कर्मचारियों की मानें तो वे वीटीसी जैसे प्रशिक्षण व नियमों की जानकारी नहीं रखते हैं। ऐसे में डीजीएमएस जिम्मेदार कम्पनी पर अपना शिकंजा कस सकता है।
खदान प्रबंधन पर हो कार्रवाई
खनन से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह मामला तो खदान प्रबंधन की घोर लापरवाही का है। इस मामले में सबसे बड़े दोषी खदान का प्रबंधन करने वाले बड़े अधिकारी हैं। हाल रोड पर कोई बोलेरो कैसे पहुंच गई, जबकि यह ऐसे वाहनों के लिये प्रतिबंधित क्षेत्र है। इसलिये सबसे पहले तो खदान प्रबंधकों के ऊपर मामला दर्ज करना चाहिये। उसके बाद होलपैक मालिक और उसके ड्राइवर को सह आरोपी बनाना चाहिये। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया जायेगा, तब तक इस तरह की दुर्घटनाएं नहीं रुकेंगी। करीब तीन वर्ष पहले भी इसी तरह की दुर्घटना हुई थी। उसमें भी होलपैक ने जीप को कुचल दिया था। 
आरोप पंजीबद्ध होगा
मामले पर जानकारी देते हुए थाना प्रभारी यूपी सिंह ने बताया कि सोमवार की देर शाम मृतकों का पीएम कराया गया है। परिजन आहत हैं, जल्द ही परिजनों के कथन दर्ज किये जायेंगे। कथन व घटनास्थल पर मौजूद गवाहों के कथनों सहित अन्य जिम्मेदारों से पूछताछ की जायेगी। उन्हीं तथ्यों के आधार पर अपराध पंजीबद्ध किया जायेगा। जिम्मेदारों पर मामला दर्ज किया जायेगा। जिसकी तैयारी चल रही है।
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।