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 बिना एक्सपायरी बताये धड़ल्ले से बेच रहे मिठाइयां

 बिना एक्सपायरी बताये धड़ल्ले से बेच रहे मिठाइयां

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा मिठाई कारोबारियों के लिए जारी नई गाइड लाइन का जिले में नहीं हो रहा पालन, जिम्मेदार बेसुध
डिजिटल डेस्क  सिंगरौली (वैढऩ)।
कोरोना के संकट भरे माहौल में जिला मुख्यालय वैढऩ में स्वादिष्ट मिठाइयों की एक दुकान का संचालन बीकानेर स्वीट्स के नाम से शुरू किया गया है। इस दुकान में मिठाई के एक से बढ़कर इतने कलेक्शन मौजूद रहते हैं कि यहां पहुंचने वाले लोग इन मिठाइयों का बिना लुत्फ लिये रह नहीं पाते। लेकिन क्या आपको पता है कि इस दुकान में सजाई गई जिन मिठाइयों का आप बड़े ही चाव से लुत्फ ले रहे हैं, उनकी क्वालिटी में जरा सी चूक आपकी सेहत को खतरे में डाल सकती है। इस स्थिति को फूड प्वाइजिनिंग कहते हैं और कई बार इसमें जान पर भी खतरा मंडराने लगता है। यानी, आप जो मिठाई खा रहे हैं, पहले उसके लिये अपनी जेब ढीली करें और फिर इसे खाने के बाद सेहत बिगड़ती है, तो फिर इलाज के चक्कर में पता नहीं कितने खर्च करने पड़ेंगे। हालांकि, सरकार ने मिठाई के सेवन में बनने वाले इस तरह के खतरे को लेकर हालही में एक नया नियम बनाया है और उसे देशभर में लागू भी कर दिया है। इस नये नियम के अनुसार मिठाई की बिक्री करने वाले दुकानदार को मिठाई की ट्रे में उस मिठाई के रेट के साथ, उसके बनाये जाने की तारीख और मिठाई कब तक खाई जा सकती है? इसकी भी तारीख दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम 1 अक्टूबर से लागू भी हो गया है, लेकिन बिकानेर स्वीट्स जैसे शहर में लगभग सभी छोटे-बड़े मिठाई के व्यवसायी हैं जो खुलेआम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इससे लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है।
इन पर नकेल कसना है जरूरी
शहर में इस नये नियम को फॉलो कराने के लिये मिठाई की बड़ी सभी दुकानों पर नकेल कसनी होगी। क्योंकि इन्हीं के यहां से मिठाइयों की बिक्री सबसे ज्यादा होती है और यहां से सेहत की सुरक्षा पर खतरा भी सबसे ज्यादा मंडराता है। जब बड़े दुकानदार नियमों का पालन करेंगे तो छोटे भी उनका अनुशरण करेंगे। जब तक बड़े दुकानदार इस नियम का पालन नहीं करेंगे, तब तक मिठाई खाना सेहत के साथ रिश्क जैसा ही है। 
प्रशासन को होना पड़ेगा सक्रिय
जिले में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इस नये नियम को फॉलो करवाना है, तो कायदे से प्रशासन को इसके लिये अपने स्तर से सक्रिय होना पड़ेगा। अकेले खाद्य विभाग के सहारे इन पर नकेल नहीं कसी जा सकती। क्योंकि जिले में अभी तक एक ह फूड इंस्पेक्टर साबिर अली थे, जो ट्रांसफर पर रीवा चले गये हैं। उनकी जगह पर जिस फूड इंस्पेक्टर का ट्रांसफर जिले में हुआ है, उसने अभी तक ज्वाइन ही नहीं किया है और उनके आने पर भी संशय बना हुआ है। ऐसे में जिले में अब फूड सेफ्टी से जुड़े मामले को लेकर हालात बेलगाम हो गये हैं। इसी का नतीजा भी है कि पिछले कुछ महीनों से जिले में एक भी खाद्य सामग्री की सैम्पलिंग तक नहीं हुई है जिससे मिलावटखोरों को एक तरह से खुलेआम छूट भी मिल गई है।
अभी से करनी होगी तैयारी
वैसे भी जल्द ही नवरात्रि, दीपावली, दशहरा, ईद मिलादुन्नबी जैसे कई पर्व आने वाले हैं। इन पर्वों में परंपरागत चलन के अनुसार मिठाई का आदान प्रदान खूब होता है। ऐसे माहौल में ही मिलावटी सामग्रियों की मिठाइयों का सिलसिला भी जोर-शोर से चलता है। इससे फूड प्वाइजनिंग जैसी कई गंभीर बीमारियों की चपेट में लोग खराब मिठाइयों के सेवन से आ जाते हैं। इसलिये कायदे से ऐसे हालात से निपटने प्रशासन को अभी से कमर कसनी होगी।
अभी से स्टोर करने लगे खोया
जिले में दीपावली, नवरात्रि जैसे अन्य आगामी पर्वों में मिठाइयों की खपत काफी ज्यादा रहती है। ऐसे में पहले तो हर साल जिले के बाहर से मिलावटी खोवे और बनी-बनाई मिठाइयां लाकर जिले में बेच दी जाती थीं, लेकिन इन दिनों कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण गत वर्षों के जैसे जिले में बाहर से खोवे व मिठाइयों के ला पाने में संशय बना हुआ है। इसलिये गाढ़ी कमाई के इस अहम अवसर पर ऐसे मिठाई कारोबारी कोई चूक नहीं होने देना चाहते हैं। ज्यादातर व्यवसाइयों ने अभी से 100-150 किलो खोवा जिले के बाहर से मंगाकर फ्रिज में स्टोर करना शुरू कर दिया है। ताकि, कुछ दिन बाद इस खोवे की मिठाई बनाकर अपनी जेब भर सकें।

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