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निजी नर्सरी जिस तरह काम करती है, उद्यानिकी विभाग उसी तरह कार्य करे -संभागायुक्त संभागायुक्त ने अवैध शराब परिवहन में जप्त वाहनों की नीलामी करने के दिये निर्देश

October 12th, 2020 15:56 IST
निजी नर्सरी जिस तरह काम करती है, उद्यानिकी विभाग उसी तरह कार्य करे -संभागायुक्त संभागायुक्त ने अवैध शराब परिवहन में जप्त वाहनों की नीलामी करने के दिये निर्देश

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। उज्जैन संभागायुक्त श्री आनन्द कुमार शर्मा ने आज कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, दुग्ध संघ एवं आबकारी विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक ली। उन्होंने संयुक्त संचालक उद्यानिकी को निर्देश दिये कि उनका विभाग निजी नर्सरियों की तरह काम करे। निजी नर्सरी संचालित करने वाला व्यक्ति पांच एकड़ की नर्सरी में 50 हजार रुपये तक की आय प्राप्त करता है, वहीं उद्यानिकी विभाग पांच हेक्टेयर की नर्सरी संचालित करने के बाद भी इतनी आय प्राप्त नहीं कर पा रही है। संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि रोड साईड में स्थित नर्सरियों के बाहर विभिन्न औषधिय पौधों, मसालों के पौधे, फलदार पौधों और विभिन्न वेराईटी के पौधों को प्रदर्शित किया जाये, ताकि आने-जाने वाले लोग इसका अवलोकन करें और प्लांट खरीदें। जो व्यक्ति नर्सरी के अन्दर विभिन्न पौधों का अवलोकन करना चाहता है, उसे अवलोकन भी कराया जाये। संभागायुक्त ने कहा कि विभाग ऐसा प्रयास करे कि छोटे किसान प्लांट लगाने के लिये आकर्षित हों। छोटे किसानों के लिये प्लांट लगाना अतिरिक्त आय का जरिया बनेगा। संभागायुक्त श्री शर्मा ने संभागीय आबकारी अधिकारी को निर्देश दिये कि वे संभाग के सभी जिले के कलेक्टर से मिलकर एवं अपने अधीनस्थ जिला आबकारी अधिकारियों को निर्देशित करें कि वे अवैध शराब परिवहन में संलग्न जप्त वाहनों की नीलामी शीघ्र ही करायें। नीलामी से राजस्व की प्राप्ति होगी। संभागायुक्त ने संभागीय मत्स्य अधिकारी को निर्देश दिये कि वे ढाई एकड़ तक के किसानों को प्रेरित करें कि वे खेत-तालाब बनायें और वहां मछली पालन करें। ढाई एकड़ का किसान भी मछली पालन से चार से पांच लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकता है। बताया गया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में एक हेक्टेयर पर सात लाख रुपये का निर्माण कार्य एवं चार लाख रुपये की अन्य राशि मत्स्य पालकों को दी जा रही है। मत्स्य पालक एक हेक्टेयर में मछली पालन कर चार से पांच लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों तथा सभी वर्ग की महिलाओं को 60 प्रतिशत एवं सामान्य वर्ग के एवं पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों को 40 प्रतिशत की छूट उक्त राशि में प्राप्त होती है। इसके अलावा शासन द्वारा मछुआरों को मोटर साइकल पर 75 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। अनुसूचित जाति, जनजाति एवं सभी वर्ग की महिलाओं के लिये इसमें 60 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की गई है। इसके अलावा मोबाइल वेन के लिये 20 लाख रुपये की अनुदान राशि भी दी जाती है। साइकल एवं ऑटोरिक्शा के लिये भी अनुदान दिया जाता है। बताया गया कि उक्त योजना में ढाई करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। संभागायुक्त श्री शर्मा ने दुग्ध संघ के कार्यों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दुग्ध संघ को अपना उत्पादन खपाने के लिये जो प्रयास करने चाहिये थे, वे पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिये और अधिक प्रयास की आवश्यकता है। संभागायुक्त ने दुग्ध संघ के डॉ.साहू को निर्देश दिये कि वे रतलाम, उज्जैन एवं मंदसौर कलेक्टर से बात कर इन जिलों में पांच-पांच हजार लीटर दूध की सप्लाई बढ़ायें। संभागायुक्त ने हिदायत दी कि यह कार्य एक माह में पूर्ण कर लिया जाये। उन्होंने नीमच के भादवा माता मन्दिर, नलखेड़ा के बगलामुखी मन्दिर, शाजापुर के राजेश्वरी माता मन्दिर, आगर-मालवा के महादेव मन्दिर एवं उज्जैन के महाकाल तथा अन्य मन्दिरों में सांची का दूध एवं अन्य सामग्री की खपत बढ़ाने के निर्देश दिये। श्री शर्मा ने कहा कि अगली बैठक में वे डॉ.साहू से तत्सम्बन्ध में फीडबेक भी लेंगे। उन्होंने डॉ.साहू को निर्देश दिये कि वे सांची के पार्लरों की संख्या भी बढ़ायें। नई कॉलोनियों में एवं घनी बस्तियों में, औद्योगिक क्षेत्रों में पार्लरों की संख्या बढ़ायें। संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि दुग्ध उत्पादकों के किसान क्रेडिट कार्ड भी शत-प्रतिशत बना लिये जायें। संभागायुक्त ने कृषि विभाग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि कृषि विस्तार की सेवाएं निरन्तर चालू रहें। कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई वेराईटी की फसल लगाने के लिये प्रेरित करें। शासन द्वारा जो लक्ष्य विभाग को दिया गया है, उस लक्ष्य से भी बढ़कर कार्य किया जाये। संभागायुक्त ने कहा कि किसानों को चना, मटर, मसूर के बीजों की समस्या न आये। विभाग मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसान गेहूं की अपेक्षा चना, मटर, मसूर की फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं और चना, मटर, मसूर का रकबा बढ़ रहा है। बैठक में सभी सम्बन्धित अधिकारीगण मौजूद थे।

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