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50 लाख के चने को लेकर गोदाम संचालक और व्यापारी भिड़े, पहला छत से कूदा तो दूसरे ने की आग लगाने की कोशिश

50 लाख के चने को लेकर गोदाम संचालक और व्यापारी भिड़े, पहला छत से कूदा तो दूसरे ने की आग लगाने की कोशिश

डिजिटल डेस्क छतरपुर/ हरपालपुर । नगर की राजपूत कालोनी में स्थित एक गेहूं गोदाम में रखे चने के मालिकाना हक को लेकर गोदाम संचालक और एक व्यापारी के बीच जमकर विवाद हुआ। इतना ही नहीं चने के लिए गोदाम संचालक अशोक गुप्ता जहां गोदाम की छत में चढ़कर ट्रक में कूद गए, वहीं गल्ला व्यापारी हीरालाल ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। कॉलोनी में यह हाई वोल्टेज ड्रामा अधिकारियों की मौजूदगी में घंटों चलता रहा, लेकिन किसी भी अधिकारी ने गोदाम संचालक व गल्ला व्यापारी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया।
क्या है पूरा मामला
दरअसल 4 मार्च को तहसीलदार बीपी सिंह को सूचना मिली थी कि गोदाम में अवैध रूप से 12 सौ क्विंटल चना जिसकी कीमत 50 लाख रुपए है रखा गया है। सूचना के बाद तहसीलदार ने गोदाम संचालक अशोक गुप्ता से चने के बारे में फोन पर जानकारी ली तो उसने उस समय बताया था कि चना हीरालाल राय पिता धर्मदास राय का है। चने के बारे में जानकारी लेने के लिए जब हीरालाल को बुलाया गया था तो उसने उस समय चने से संबधित किसी भी तरह के दस्तावेज पेश नहीं किए। लिहाजा चने को जब्त कर गोदाम को सील कर दिया गया था। और पूरे मामले को जांच में लिया गया था। हालांकि 5 मार्च को गोदाम मालिक अशोक गुप्ता ने चने पर मालिकाना हक जताया और कहा कि चना उसके परिचितों का है। हीरालाल ने काशी विश्वनाथ ट्रेडिंग कंपनी द्वारा चना क्रय करना बताया। लिहाजा तहसीलदार ने जांच में पाया कि चना काशी विश्वनाथ ट्रेडिंग फर्म का है, और मालिकाना हक भी हीरालाल का है।
चने के लिए जान देने पर उतारू हुए दोनों लोग
गोदाम में रखे चने की कीमत 50 लाख रुपए बताई गई है। लिहाजा चने को पाने के लिए गोदाम मालिक और व्यापारी दोनों जान देने पर उतारु हो गए। इस दौरान पुलिस भी बुलाई गई थी, लेकिन पुलिस ने भी दोनों लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हंगामे के चलते मौके पर तमाशबीनों की अच्छी खासी भीड़ भी घंटों एकत्र रही।
चने का कब्जा दिलाने पहुंचे थे अधिकारी
 गोदाम में रखे चने का कब्जा दिलाने के लिए मंडी सचिव, पटवारी और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, जब गोदाम को खुलवाकर चना हीरालाल के सुपुर्द किया जा रहा था। तभी अशोक गुप्ता वहां पहुंचा और हंगामा खड़ा कर दिया। और छत में चढ़कर ट्रकों में लोड हो रहे चने के ऊपर कूद गया। हलांकि छत से कूदने पर किसी तरह का हादसा नहीं हुआ, लेकिन दोनों लोगों ने जमकर हंगामा किया।
जांच में पाया गया कि व्यापारी का है चना
जब्त चने की जांच में पाया गया था कि गोदाम में रखा चना व्यापारी हीरालाल का है। सोमवार को हीरालाल को चना सुपुर्द करने की कार्रवाई शुरु होने के पहले ही हीरालाल और गोदाम संचालक अशोक गुप्ता द्वारा जमकर हंगामा किया गया। हालांकि बाद में मामला शांत हुआ और चना हीरालाल के सुपुर्द कर दिया गया है।
- सुरेंद्र खरे, मंडी सचिव हरपालपुर
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।