Pawai News: गांव की माटी से ISRO और अब MPPSC तक पहुंचा राजवेंद्र का सफर

गांव की माटी से ISRO और अब MPPSC तक पहुंचा राजवेंद्र का सफर
करही के ग्रामीण स्कूल से पढ़ाई शुरू कर दिल्ली विश्वविद्यालय और ISRO तक बनाई पहचान, अब MPPSC में गणित के सहायक प्राध्यापक पद पर चयन

डिजिटल डेस्क,पवई। छोटे से गांव करही की गलियों से शुरू हुआ एक युवा का सफर अब मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा जगत तक पहुंच गया है। गांव के शासकीय स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले राजवेंद्र प्रजापति ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर पहले दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में उच्च शिक्षा हासिल की और इसके बाद भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग में ISRO मुख्यालय, बेंगलुरु में सेवाएं दीं। अब उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहायक प्राध्यापक परीक्षा-2024 में गणित विषय के सहायक प्राध्यापक पद पर चयन प्राप्त किया है।

राजवेंद्र की इस सफलता से उनके गृहग्राम करही सहित पवई क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा किसी बड़े शहर के निजी स्कूल से नहीं, बल्कि गांव के शासकीय विद्यालय से शुरू की और लगातार आगे बढ़ते हुए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक अपनी पहचान बनाई।

करही के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर

राजवेंद्र प्रजापति, करही निवासी शिक्षक रमेश प्रजापति के पुत्र हैं। उन्होंने कक्षा 5वीं तक की शिक्षा शासकीय माध्यमिक शाला करही से प्राप्त की। इसके बाद कक्षा 6वीं से 12वीं तक जवाहर नवोदय विद्यालय रमखिरिया में अध्ययन किया। वर्ष 2014 में कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे।

दिल्ली में उन्होंने वर्ष 2018 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी गणित की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 2021 में एमएससी गणित की डिग्री हासिल की।

ISRO में सेवा के बाद अब शिक्षा के क्षेत्र में नई पारी

उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद राजवेंद्र ने भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग में कार्य करते हुए ISRO मुख्यालय, बेंगलुरु में अपनी सेवाएं दीं। अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े प्रतिष्ठित संस्थान में कार्य करने के बाद अब MPPSC के माध्यम से उनका चयन गणित विषय के सहायक प्राध्यापक पद पर हुआ है।

राजवेंद्र की सफलता गांव के उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। करही के शासकीय स्कूल से शुरू हुआ उनका सफर दिल्ली विश्वविद्यालय, ISRO और अब मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र तक पहुंचा है। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

Created On :   29 Sept 2026 6:05 PM IST

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