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बदलाव: अब काम के बूते कहलाएंगी किसान, प्रमाणपत्र लेने 1 लाख से ज्यादा महिलाएं आईं सामने, यवतमाल से सबसे अधिक संख्या

डिजिटल डेस्क, पुणे. महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम 2026 को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। कृषि विभाग ने इस कानून के तहत महिला किसानों को प्रमाण पत्र देने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है। अब तक 1,05,416 महिला किसानों ने प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है। इनमें यवतमाल से सबसे अधिक 9897, छत्रपति संभाजीनगर से 7644, बुलढाणा से 6176, नाशिक से 5909, पुणे से 3687, नागपुर से 1299 आवेदन शामिल हैं। सबसे कम 833 आवेदन सिंधुदुर्ग से आए हैं।
राज्य सरकार ने 17 सितंबर को ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ के तहत Mahila Shetkari Portal लॉन्च किया था। यह देश का पहला कानून है जो जमीन के मालिकाना हक की परवाह किए बिना महिला को स्वतंत्र किसान के तौर पर मान्यता देता है। विधानसभा ने जुलाई 2026 में इसे सर्वसम्मति से पास किया और यह 22 जुलाई से लागू हुआ।
क्या होगा लाभ? : इससे किसान महिलाओं को स्वतंत्र पहचान मिलेगी। काफी महिलाएं खेतों में काम करती हैं, लेकिन जमीन का स्वामित्व उनके नाम पर नहीं है। इसलिए उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ता है। इस प्रमाण पत्र के जरिए बैंक से सस्ता कृषि ऋण, फसल बीमा, खाद, बीज और आधुनिक कृषि उपकरण आसानी से मिल सकेंगे। महिला किसानों का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस बनाया जाएगा ताकि योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके।
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प्रमाणपत्र के छह चरण
1. ग्राम पंचायत या नगर पंचायत क्षेत्र की 18 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिला mahakrishi पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करेंगी।
2. ग्रामसभा/नगर पंचायत इसकी जांच करेगी।
3. मंजूर होने पर 15 दिन के अंदर प्रमाणपत्र जारी होगा है।
4. अस्वीकार होने पर सात दिन के अंदर लिखित में कारण बताया जाएगा।
5. अस्वीकृत होने पर महिला 120 दिन के अंदर अपील कर सकती हैं।
जमीन नहीं, काम महत्वपूर्ण
महिला किसान प्रमाणपत्र के लिए 7/12 पर जमीन का स्वामित्व होना जरूरी नहीं है। काम में भागीदारी ही मानदंड है। इस कानून में ‘खेती’ की परिभाषा व्यापक कर दी है। अब इसमें फसलों की खेती, बीज उत्पादन, डेयरी व्यवसाय, पशुपालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, बागवानी, पुष्प खेती, मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन, खाद निर्माण जैसे कार्यों को भी शामिल किया गया है। इसमें पट्टे पर खेती करने वाली महिलाएं, भूमिहीन खेत मजदूर, नर्सरी मजदूर, भूमिहीन पशुपालक और चरवाहा महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
Created On :   24 Sept 2026 7:22 PM IST












