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सागर जहरीली शराब कांड: एसपी रहते अनुराग सुजानिया के कार्यकाल में दो बड़े हादसे, अब तक 48 मौत, सरकार की जवाबदेही पर सवाल

सागर/भोपाल। मध्यप्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में मौतों का आंकड़ा बढ़ने के साथ अब सवाल सिर्फ शराब माफिया तक सीमित नहीं हैं। सवाल यह भी है कि अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन का तंत्र कितना सक्रिय था और जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कहां तक पहुंची है।
इस मामले ने इसलिए भी ज्यादा गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि सागर के वर्तमान पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया इससे पहले मुरैना के एसपी रह चुके हैं। वर्ष 2021 में उनके मुरैना कार्यकाल के दौरान जहरीली शराब कांड में 24 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद उन्हें एसपी पद से हटाकर मुख्यालय भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। अब सागर में इसी तरह की त्रासदी के बाद उनकी पोस्टिंग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सवाल सिर्फ शराब माफिया पर नहीं, सिस्टम पर भी
सागर की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध शराब की बिक्री हो रही थी तो स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? यदि कोई सूचना पहले से मौजूद थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और अगर प्रशासन के पास कोई पूर्व सूचना नहीं थी, तो अवैध शराब के नेटवर्क की निगरानी का सिस्टम आखिर कितना प्रभावी है?
सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि घटना के बाद कार्रवाई केवल शराब बेचने वालों तक सीमित रहेगी या उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिनके क्षेत्र में यह अवैध कारोबार चल रहा था।
कौन हैं IPS अनुराग सुजानिया?
अनुराग सुजानिया 2014 बैच के IPS अधिकारी हैं। वे मध्यप्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वे टीकमगढ़ और मंदसौर में एसपी रह चुके हैं। 2024 में वे पुलिस मुख्यालय में AIG (Admin) के पद पर भी रहे।
मुरैना का पुराना रिकॉर्ड फिर चर्चा में क्यों?
साल 2021 में मुरैना में जहरीली शराब से 24 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उस समय अनुराग सुजानिया मुरैना के एसपी थे। घटना के बाद उन्हें पद से हटाया गया था । अब सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद वही पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है।
यहां सरकार से सीधा सवाल है—
क्या मुरैना की घटना के बाद पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए कोई ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी, जिससे भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो?
अगर ऐसी व्यवस्था थी तो सागर में वह काम क्यों नहीं कर सकी?
अब कलेक्टर प्रतिभा पाल भी सवालों के घेरे में क्यों?
सागर में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं है। जिले की कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रतिभा पाल भी पूरे प्रशासनिक तंत्र की प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं। सागर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें वर्तमान कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है। वे 2012 बैच की IAS अधिकारी हैं।
उनका प्रशासनिक करियर भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। वे इससे पहले रीवा की कलेक्टर और इंदौर नगर निगम की आयुक्त रह चुकी हैं।
इंदौर बावड़ी हादसे के बाद भी हुई थी बड़ी प्रशासनिक चर्चा
30 मार्च 2023 को इंदौर के बेलेश्वर महादेव मंदिर की बावड़ी की छत गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। अगले दिन मृतकों की संख्या 36 बताई गई थी। उस समय प्रतिभा पाल इंदौर नगर निगम आयुक्त थीं। घटना के बाद नगर निगम के एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर और एक बिल्डिंग अधिकारी को निलंबित किया गया था।
इसके कुछ ही दिनों बाद प्रशासनिक फेरबदल में प्रतिभा पाल को इंदौर नगर निगम आयुक्त पद से हटाकर रीवा कलेक्टर बनाया गया। उस समय मीडिया रिपोर्टों में बावड़ी हादसे के बीच हुए इस तबादले को लेकर सवाल भी उठे थे।
सरकार से अब ये सवाल टालना मुश्किल होगा
1. अवैध शराब का नेटवर्क किसकी निगरानी में चल रहा था?
सागर में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री हो रही थी या नहीं? पुलिस और आबकारी विभाग के पास इससे संबंधित कोई खुफिया इनपुट था?
2. अगर इनपुट था तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या स्थानीय पुलिस, आबकारी विभाग या प्रशासन को पहले से किसी अवैध शराब नेटवर्क की जानकारी थी? अगर थी तो कार्रवाई किस स्तर पर हुई?
3. SP की जवाबदेही कैसे तय होगी?
मुरैना में जहरीली शराब कांड के समय भी अनुराग सुजानिया एसपी थे। अब सागर में उनके कार्यकाल में ऐसी ही त्रासदी सामने आई है। क्या सरकार इस समानता को देखते हुए उनकी भूमिका और पिछली कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा कराएगी?
4. कलेक्टर की जिम्मेदारी कहां तक?
जिले में पुलिस, आबकारी, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की जिम्मेदारी प्रशासन की भी होती है। क्या घटना से पहले इन विभागों के बीच अवैध शराब को लेकर कोई समीक्षा बैठक हुई थी?
5. आबकारी विभाग पर कार्रवाई कब?
यदि जांच में अवैध शराब की बिक्री, सप्लाई या निगरानी में विभागीय चूक सामने आती है तो क्या संबंधित बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी?
मुरैना से सागर तक एक बड़ा सवाल
- क्या सरकार ने मुरैना के बाद कोई सबक लिया था?
- अगर लिया था तो सागर में वही स्थिति दोबारा कैसे बनी?
- और अगर जांच में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो क्या कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी?
यह सिर्फ एक जिले का मामला नहीं है। यह सवाल मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ सरकारी निगरानी, पुलिस-आबकारी विभाग के समन्वय और जिला प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा है।
अब निगाह सरकार पर है कि वह इस मामले में केवल आरोपियों को पकड़कर मामला बंद करती है या पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी तय कर मिसाल भी कायम करती है।
Created On :   8 Sept 2026 10:36 AM IST











