Diwali 2026: भगवान राम आए अयोध्या तो जले दीप, फिर दिवाली पर क्यों होती है लक्ष्मी-गणेश की पूजा? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और खास वजह

डिजिटल डेस्क, भोपाल। दीपावली का नाम आते ही भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की कहानी याद आती है। मान्यता है कि 14 साल का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे थे, तब पूरी नगरी को दीपों से सजाकर उनका स्वागत किया गया था। इसी खुशी में हर साल दीपावली मनाई जाती है। लेकिन यहां एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि अगर दिवाली भगवान राम की घर वापसी की खुशी में मनाई जाती है, तो इस दिन घरों और मंदिरों में भगवान राम की जगह मुख्य रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है? आखिर इस परंपरा के पीछे क्या मान्यता और धार्मिक वजह हैं? आइए जानते हैं...
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भगवान राम की वापसी और दिवाली का क्या है संबंध?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के वचन को पूरा करने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया था। वनवास के दौरान रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। इसके बाद भगवान राम ने हनुमान जी और वानर सेना की मदद से लंका पहुंचकर रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया। रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। उस समय अमावस्या की रात थी। भगवान राम के स्वागत में अयोध्या के लोगों ने अपने घरों और गलियों में दीपक जलाए। पूरी नगरी दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। इसी घटना को याद करते हुए उत्तर भारत में दीपावली को भगवान राम की अयोध्या वापसी और बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
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दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा क्यों होती है?
दीपावली का पर्व मनाने के पीछे केवल रामायण से जुड़ी मान्यता ही नहीं है। दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने के पीछे सबसे बड़ी मान्यता धन, सुख, समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी है। हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में साफ-सफाई, रोशनी और सकारात्मकता होती है, वहां अपनी कृपा बरसाती हैं।
एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए मां लक्ष्मी की पूजा का संबंध धन-संपत्ति के साथ-साथ जीवन में सुख और सौभाग्य आने से भी है। दीपावली के समय व्यापारी वर्ग नए बही-खाते शुरू करता है। दुकानों और प्रतिष्ठानों में भी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे व्यापार में तरक्की होती है और पूरे साल आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। इसलिए दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का मुख्य उद्देश्य घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है।
मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
एक और सवाल कई लोगों में मन में आता है कि, जब लक्ष्मीजी के साथ भगवान विष्णु की पूजा ना होकर गणेशजी की आराधना प्रमुख है। दरअसल, भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ शुरुआत का देवता माना जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, यानी वे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि काम में कोई रुकावट न आए और वह सफलतापूर्वक पूरा हो।
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इसके अलावा मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के पीछे कोई पौराणिक कथा भी हैं। एक कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को इस बात का दुख हुआ कि उनके पास सब कुछ होने के बावजूद मातृत्व का सुख नहीं है। उन्होंने अपनी यह इच्छा माता पार्वती के सामने रखी। मां पार्वती ने उनकी भावना को समझते हुए अपने पुत्र भगवान गणेश को मां लक्ष्मी को सौंप दिया। इसके बाद मां लक्ष्मी ने गणेश जी को अपना पुत्र मान लिया। कहा जाता है कि मां लक्ष्मी ने यह भी वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति उनकी पूजा करेगा, उसे गणेश जी की पूजा भी जरूर करनी होगी। तभी उसकी पूजा पूरी मानी जाएगी।
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