Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर इस विधि से करें भगवान काल भैरव की पूजा, नोट करें जरूरी सामग्री और मंत्र

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि कालाष्टमी (Kalashtami) का व्रत रखा जाता है। यह दिन समय और न्याय के रक्षक माने जाने वाले भगवान काल भैरव को समर्पित है। पुराणों के अनुसार, कालभैरव को भगवान शिव का उग्र अवतार माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि विधान से पूजा करने पर भगवान भैरव अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करते हैं। उनकी पूजा करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है। फिलहाल, अधिक मास चल रहा है और इस महीने में कालाष्टमी व्रत 8 जून 2026, सोमवार को है। आइए जानते हैं इसकी पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त के बारे में...
तिथि कब से कब तक
पंचांग के अनुसार, 8 जून (सोमवार) को कालाष्टमी मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत भी रखा जाएगा। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 8 जून को सुबह 3 बजकर 24 मिनट से होगी। जबकि, इस तिथि का समापन 9 जून को 3 बजकर 23 मिनट पर होगा।
कालाष्टमी व्रत पूजा सामग्री
इस दिन पूजा करने के लिए काला तिल, फूल, अगरबत्ती, नारियल, मिठाई, जल और दूध की आवश्यकता होती है। खास तौर पर इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे में आपको सरसों का तेल और दीपक भी पूजा के पहले रखकर बैठना चाहिए।
ऐसे करें पूजा
- कालाष्टमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों।
- भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं और पितरों का तर्पण और श्राद्ध करें।
- इस दिन काल भैरव की पूजा कर उन्हें जल अर्पित करना चाहिए।
- भगवान शिव-पार्वती की पूजा भी करें।
- काल भैरव को फूल, चंदन, रोली, सिंदूर आदि अर्पित करें।
- काल भैरव को फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं।
- काल भैरव की पूजा में काले तिल, धूप, दीप, गंध, उड़द आदि का इस्तेमाल करें।
- पूजा के दौरान भैरव कथा का पाठ करें।
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें
ॐ कालभैरवाय नम:।।
ॐ भयहरणं च भैरव:।।
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि।।
ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय. कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा।।
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Created On :   4 Jun 2026 11:10 PM IST








