दैनिक भास्कर हिंदी: भैरवनाथ जी की सवारी काला स्वान (कुत्ता) क्यों है ? आइए जानते हैं

February 6th, 2019

​डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भैरव का अर्थ है भय का नाश करने वाला। जब किसी भी अन्य साधनों के द्वारा मनुष्य का जीवन सुखमय नहीं हो, तब भैरव को प्रसन्न करने पर उसे चमत्कारी लाभ मिलने लगता है। शत्रुओं के भय का नाम भैरव है। आपने देखा होगा भैरव के साथ में एक काला स्वान (कुत्ता) सदैव रहता है। क्या है इसका कारण ?

हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार सभी देवी-देवता की अपनी सवारी होती है। जिसे उनका वाहन कहा जाता है और हमारे इन ग्रंथों के अनुसार भैरव का वाहन स्वान (कुत्ता) है। भैरव वाहन पर बैठे तो कभी दिखाई नहीं देते हैं, परन्तु उनके साथ में एक काला स्वान (कुत्ता) सदा रहता है, इसके पीछे क्या कारण है? आइए जानते हैं...

शत्रुओं से कभी भय नहीं
हर देव अपना ऐसा वाहन चाहता है जिसके साथ उसका अपना संतुलन बना रहे जैसे कुत्ता एक ऐसा जीव है जो शत्रुओं से कभी भय नहीं खाता। रात का अंधेरा हो या दिन का उजाला, अपनी सीमा में किसी को प्रवेश नहीं करने देता। कोई भी शत्रु जितना अधिक बल प्रयोग करेगा, उतना ही उग्र रूप धारण कर उसका सामना करेगा। स्वान (कुत्ता) अपने शत्रु को कभी भूलता भी नहीं है। 

स्वामी के प्रति पूर्ण वफादार
स्वान हर समय जागरूक अवस्था में रहता है, सोते समय भी वह आस-पास में होने वाली हर आहट पर ध्यान रखता है। जरा भी भय होने पर वह तत्काल सचेत हो जाता है। स्वान अपने स्वामी के प्रति पूर्ण वफादार रहता है अपने जीवित रहते अपने स्वामी पर कोई भी आंच नहीं आने देता। स्वान की घ्राण (सूंघने) शक्ति अति तीव्र होती है। कोई होने वाली घटना का यह पूर्वानुमान कर लेती है और इसी शक्ति के कारण स्वान(कुत्ता) सदैव सतर्क रहता है। 

सबसे अलग पहचान
इन गुणों के कारण भैरव ने चुना अपना वाहन कुकुर। परन्तु काले कुकुर को ही भैरव ने अपनी सवारी के रूप में क्यों चुना ? काला रंग सुद्रढ़ता एवं परिपक्वता की निशानी है, काला रंग रंगों में सबसे अलग पहचान रखता है। यह हर रंगों को अपने नीचे दबा लेता है। काले रंग वाले प्राणी का ह्रदय बड़ा मजबूत होता है। इसलिए ही भैरव ने काले रंग के स्वान को अपनी सवारी के रूप में चुना।  

इस तरह ये देव भी होते हैं प्रसन्न
यदि आप भैरव की पूजा-आराधना करने के साथ-साथ किसी काले कुत्ते को दूध के साथ जलेबी, इमरती या मालपुआ खिलाते हैं तो भैरव अति प्रसन्न होते हैं। वैसे यह प्रथा सदियों से चली आई है, जब विशेष अवसर पर गाय, कुकुर व कौवे के लिए सबसे प्रथम भोजन निकाला जाता है। काले कुत्ते को शनिवार के दिन प्रिय भोजन देने पर केवल भैरव ही नहीं – शनि, राहु और केतु भी प्रसन्न होते है।