Vakratund Sankashti Chaturthi: प्रथम पूज्य भगवान गणेश की चतुर्थी पर इस विधि से करें पूजा, जीवन की बाधाओं से मिलेगी मुक्ति

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वहीं कार्तिक मास में आने वाली चतुर्थी को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ संकट से मुक्ति पाने से जुड़ा है। इसलिए भक्त इस दिन भगवान गणेश से अपने परिवार की खुशहाली, अच्छी सेहत और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
इस दिन व्रत रखने के साथ ही भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। संकष्टी चतुर्थी पर दिनभर व्रत रखने के बाद चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। यह व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व, पूजा की आसान विधि और शुभ मुहूर्त...
चतुर्थी तिथि कब से कब तक
चतुर्थी तिथि आरंभ: 29 अक्तूबर 2026, गुरुवार की सुबह 01 बजकर 06 मिनट (AM) से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्तूबर 2026 गुरुवार की रात 10 बजकर 09 मिनट तक
इस विधि से करें पूजा
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूरे दिन व्रत रखें।
- घर के मंदिर या साफ स्थान पर चौकी रखें।
- उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति अथवा तस्वीर स्थापित करें।
- इसके पास में जल से भरा कलश रखें और घी का दीपक जलाएं।
- भगवान गणेश को रोली या चंदन का तिलक लगाएं।
- इसके बाद फूल, दूर्वा तथा धूप-दीप अर्पित करें।
- भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई अर्पित करें।
- इसके साथ भगवान गणेश को दूर्वा भी अर्पित करें।
- भगवान गणेश के मंत्र का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- अंत में गणेशजी की आरती करके परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें
डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।
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