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फिल्म धड़क ने की उम्मीद से कम कमाई, ये शख्स है बेहद खुश

September 25th, 2018 14:29 IST
फिल्म धड़क ने की उम्मीद से कम कमाई, ये शख्स है बेहद खुश

डिजिटल डेस्क, मुंबई। जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर स्टारर फिल्म धड़क 20 जुलाई को रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म के साथ कोई ऐसी बिग बजट फिल्म नहीं आई है, जो धड़क के बिजनेस पर किसी भी तरह का प्रभाव डाल सके। मगर एक बड़े प्लेटफार्म और काफी चर्चित चेहरों को लेकर बनी, इस फिल्म ने पहले दिन उतनी कमाई नहीं की जितनी इससे उम्मीद की जा रही थी। काफी लोगों ने इन नए एक्टर्स की तारीफ की, वहीं कुछ ऐसे भी थे जिन्हें मूवी बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। इनमें से एक हैं एक्ट्रेस मंदिरा बेदी के पति राज कौशल। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर फिल्म के बारे में अपनी राय सामने रखी।

'युवाओं को डराने का काम किया गया'
उन्होंने लिखा- "मुझे पता है कि सैराट कितनी बड़ी हिट है। उसके एक्टर्स बेहद अच्छे थे। डायरेक्शन काफी प्रभावशाली था, लेकिन फिल्म का सार या कहें उसका मोरल बिल्कुल सही नहीं था। इस फिल्म ने ऑनर किलिंग को बढ़ावा दिया। इसमें दिखाया गया कि एक निम्न जाति का लड़का किसी उच्च जाति की लड़की से प्यार नहीं कर सकता। इसने युवा दिमाग को डराने का काम किया। इस फिल्म ने ये समझाया कि आप तभी किसी से प्यार कर सकते हैं, जब आपको उसका धर्म, जाति, गोत्र और उसके परिवार के मूल्य पता हों। ये आज के समय और समाज में बहुत गलत है"।

समाज के नजरिए को खराब करती हैं ऐसी फिल्में
अपनी बात को आगे रखते हुए राज कौशल ने लिखा कि- "हम इस नजरिए को बदलने के लिए हर दिन मीडिया और एड्वर्टाइजिंग इंडस्ट्री से जूझते हैं। हम हर दिन लड़ते हैं ताकि लोगों का प्यार के प्रति रवैया बदले। पर इसके बाद 'सैराट' जैसी फिल्में आती हैं और सूपरहिट हो जाती हैं। फिर बॉलीवुड ऐसी रीजनल फिल्म को 'धड़क' नाम से नैशनल फिल्म में तब्दील कर देता है"।

उन्होंने कहा "क्यों? ऐसा रोमान्स बनाने की क्या जरूरत थी, जहां प्यार हार गया? अंडरवर्ल्ड को क्यों बढ़वा दिया गया? ऐसे मोरल वाली फिल्म को मास प्लेटफॉर्म पर क्यों उतारा गया? फिल्म में एक्टिंग कर रहे युवा एक्टर्स बहुत शानदार हैं और मैं उन्हें उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं। पर मुझे खुशी है कि धड़क ने इस नैशनल प्लेफॉर्म पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है"।

बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रहा प्रदर्शन
इस पोस्ट को पढ़कर जाहिर है कि सभी खुश नहीं होंगे पर मंदिरा के पति ने आखरी में यह भी लिखा है कि ये उनके अपने विचार हैं और वो इस पर वाद-विवाद नहीं चाहते। शशांक खेतान के डायरेक्शन में बनी धड़क की स्टोरी नागराज मंजुले ने लिखी है। फिल्म का म्यूजिक अजय-अतुल ने दिया है। ये जोड़ी सैराट में भी म्यूजिक कंपोज कर चुकी है।  धर्मा प्रोड्क्शन्स और जी स्टूडियोज के बैनर तले बनी इस फिल्म को 20 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज कर दिया गया और बॉक्स ऑफिस पर ये अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।