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क्या मुन्नाभाई 3 में अरशद वारसी की जगह रणबीर कपूर बनेंगे सर्किट?

July 19th, 2018 19:07 IST
क्या मुन्नाभाई 3 में अरशद वारसी की जगह रणबीर कपूर बनेंगे सर्किट?

डिजिटल डेस्क, मुंबई। ये तो सभी जानते हैं कि मुन्नाभाई और सर्किट की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे पॉपुलर जोड़ियों में से एक हैं। 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' और 'लगे रहो मुन्नाभाई' जैसी हिट फिल्मों में सर्किट के रोल को भी उतना ही पसंद किया गया, जितना की मुन्नाभाई के किरदार को। अभिनेता अरशद वारसी के फिल्मी करियर में ये किरदार सबसे खास बन चुका है, लेकिन अब लगता है कि अरशद के इस यादगार कैरेक्टर पर खतरा मंडरा रहा है। जी हां, बॉलीवुड के गलियारों से उठती खबरों पर यकीन करें तो 'मुन्नाभाई' सीरीज की तीसरी फिल्म में अरशद की जगह रणबीर कपूर को कास्ट किया जा सकता है।

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हिरानी की पहली पसंद है रणबीर
हाल ही में एक वेबसाइट को दिए इंटररव्यू में हिरानी ने कंफर्म कर दिया था कि वो 'मुन्नाभाई सीरीज' की अगली फिल्म पर जल्द ही काम शुरू करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि आने वाले दो साल में ये फिल्म सामने आ जाएगी। दरअसल, फिल्म 'संजू' में रणबीर की परफॉर्मेंस को देखने के बाद डायरेक्टर राजकुमार हिरानी उनसे बेहद प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो हिरानी इस फिल्म में रणबीर को सर्किट के रोल में अरशद की जगह रिप्लेस करने का मन बना चुके हैं।

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रणबीर के आने से पड़ेगा बड़ा फर्क
सर्किट का रोल कितना भी अहम क्यों न हो, लेकिन फिल्म में ये एक सेकेंड लीड रोल है। रणबीर एक बड़े स्टार हैं और वो इन दिनों सोलो रोल वाली फिल्मों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। ऐसे में वो सर्किट का सेकेंड लीड रोल एक्सेप्ट करेंगे ये थोड़ा मुश्किल होगा। हालांकि रणबीर पहले भी 'पीके' में हिरानी के लिए गेस्ट अपीयरेंस कर चुके हैं तो हो सकता है वो हिरानी के नाम पर ये छोटा रोल स्वीकार कर लें। ये भी हो सकता है कि सर्किट के रोल की लंबाई फिल्म में बढ़ाते हुए उसे मुन्नाभाई के बराबर ले आया जाए। वैसे रणबीर फिल्म से जुड़ेंगे तो इसकी स्टार वैल्यू बढ़ जाएगी और बॉक्स ऑफिस पर प्रोड्यूसर्स को बड़ा फायदा मिल सकता है।

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फिर क्या होगा अरशद वारसी का?
सर्किट के रोल में किसी और एक्टर को देखना दर्शकों के लिए इतना आसान नहीं होगा। अरशद ने इस रोल को दोनों ही फिल्मों में जबरदस्त तरीके से निभाया है। मु्न्नाभाई की साइड किक होने के साथ ही सर्किट उसका दोस्त भी है और दर्शक उसके परदे पर आने का इंतजार करते हैं। इससे पहले एक दफा आमिर खान ने भी सर्किट बनने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा था कि इस रोल में अरशद की जगह किसी और को सोचा भी नहीं जा सकता। वैसे अरशद वारसी के साथ ऐसा पहली बार नहीं होगा। इससे पहले 'जॉली एलएलबी' के सीक्वल में भी उनकी जगह अक्षय कुमार को ले लिया गया था और अब अगर उनके हाथों से ये रोल भी गया तो उनके करियर के लिए ये बहुत खराब होगा।    

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।