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HEALTH: थायरॉइड का राम बाण इलाज, घरेलु उपचार से दें बीमारी को मात

HEALTH: थायरॉइड का राम बाण इलाज, घरेलु उपचार से दें बीमारी को मात

डिजिटल डेस्क, मुंबई। आज के समय में बीमारी उम्र देखकर नहीं आती है, वजह है हमारा खान-पान और रहन-सहन। हम अपने जीवन में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमारे पास खुद के लिए भी समय नहीं है। जिसके चलते हम कई बीमारियों के चपेट में आ जाते हैं। एक ऐसी ही बीमारी है थायरॉइड। ये बीमारी दो तरह की होती है। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म। एक में शरीर में सूजन आती है तो दूसरे में शरीर पतला होता जाता है। लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अपनी आदतों में सुधार के साथ ही कुछ घरेलु नुस्खा अपनाने से इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। तो आइए जानते हैं थायरॉइड के लक्षण और घरेलु  नुस्खा  क्या है-

थायराइड दरअसल एक एंडोक्राइन ग्लैंड है जो बटरफ्लाई आकार का होता है और ये गले में स्थित है। इसमें से थायराइड हार्मोन निकलता है जो शरीर में मेटाबॉलिज्म को संतुलित करता है। थायराइड ग्लैंड शरीर से आयोडीन की मदद से हार्मोन बनाता है।

थायराइड के लक्षण...
- शारीरिक व मानसिक विकास का धीमा हो जाना
- 12 से 14 साल के बच्चे की शारीरिक वृद्धि रुक जाती है
- शरीर का वजन बढ़ने लगता है और शरीर में सूजन भी आ जाती है
- सोचने व बोलने की क्रिया धीमी हो जाती है
- शरीर का ताप कम हो जाता है, बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है
- हर समय थकावट महसूस होना
- अक्सर और अधिक मासिक-धर्म होता है
- स्मरणशक्ति कमजोर होना
- त्वचा और बालों का सूखा और रूखा होना
- कर्कश वाणी
- सर्दी न सह नहीं पाना
- चिड़-चिड़ापन या अधैर्यता
- ठीक से नींद नहीं आना
- थायराइड का बढ़ जाना
- आंख की समस्या या आंख में जलन
- गर्मी के प्रति संवेदनशीलता
- शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है
- उत्तेजना और घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं
- शरीर के वजन में असंतुलन पैदा होना
- कई लोगों की हाथ-पैर की अंगुलियों में कम्पन उत्पन्न हो जाता है
- मधुमेह रोग होने की प्रबल सम्भावना बन जाती है

ब्लड जांच से ही पता चलती है बीमारी...
शुरुआती स्तर पर पहचान होने पर थायरॉइड को न सिर्फ आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि इससे छुटकारा भी मिल जाता है। पर देर से पहचान होने पर ताउम्र दवा का सेवन करना पड़ सकता है। थायरॉइड की जांच ब्लड टेस्ट से की जाती है। ब्लड में टी थ्री, टी फोर एवं टीएसएच (थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन) टेस्ट किया जाता है।

अधिक शिकार हैं महिलाएं...
पुरुषों के मुकाबले महिलाएं थायरॉइड की अधिक शिकार हो रही हैं। तनाव और अवसाद इसकी एक बड़ी वजह है। थायरॉइड की वजह से महिलाओं को मोटापा, तनाव, कोलेस्ट्रॉल, बांझपन, ऑस्टियोपोरोसिस व अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि इस बारे में कई मिथक भी प्रचलित हैं, जैसे मरीज को जीवनभर दवाओं का सेवन करना होता है या बुजुर्ग महिलाओं को ही थायरॉइड होता है।


थायराइड को दूर करने के घरेलू इलाज...

साबुत धनिये का उपयोग : एक गिलास पानी में 2 चम्मच साबुत धनिये को रात के समय में भिगोकर रख दें तथा सुबह के समय में इसे मसलकर उबाल लें। फिर जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो खाली पेट इसे पी लें तथा गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें। यह उपचार लगातार करने से थायरायड की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

दही और दूध का सेवन : जिन व्यक्तियों को थायराइड की समस्या होती है उन्हें दही और दूध का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए। दूध और दही में मौजूद कैल्शियम, मिनरल्स और विटामिन्स थायराइड से ग्रसित रोगियों को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।

मुलेठी का सेवन : जिन व्यक्तियों को थायराइड की समस्या होती है उन्हें बहुत जल्दी थकान लगने लगती है और वे जल्दी ही थक जाते हैं। एैसे में मुलेठी का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है। मुलेठी में मौजूद तत्व थायराइड ग्रंथी को संतुलित बनाते हैं और थकान को उर्जा में बदल देते हैं और थायराइड की समस्या से निजात मिलती है।

फलों और सब्जियों का सेवन : थायराइड के रोगियों को फलों और सब्जियों का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए. फल और सब्जियों में एंटीआक्सिडेंटस होता है। जो थायराइड को कभी बढ़ने नहीं देता है। सब्जियों में टमाटर, हरि मिर्च आदि का सेवन करें. इससे थायराइड की समस्या से छुटकारा मिलता है।

फलों का रस : थायराईड रोगों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस (नारियल पानी, पत्तागोभी, अनानास, संतरा, सेब, गाजर, चकुन्दर, तथा अंगूर का रस) पीना चाहिए, इससे थायराईड की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

थायराइड के उपचार में एक्यूप्रेशर है फायदेमंद...

एक्युप्रेशर थेरेपी के प्रतिबिम्ब बिंदु हाथों एवं पैरों दोनों के अंगूठे के बिलकुल नीचे ऊंचे उठे हुए भाग में स्थित होता हैं जिनके प्रयोग से थायरायड को कम किया जा सकता है।

थायराइड अल्पस्राव की अवस्था में इन केन्द्रों बाएं से दायें प्रेशर देना चाहिए तथा अतिस्राव की स्थिति में प्रेशर दायें से बाएं देना चाहिए। इसके अलावा पिट्यूटरी ग्?लैंड के भी प्रतिबिम्ब बिंदु पर भी प्रेशर दें।

इससे थायराइड की समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इस विधि का प्रयोग एक से तीन मिनट तक प्रतिदिन दो बार करना चाहिए।

इसका रखें खास ख्याल...

अपने आहार में आयोडीन वाला खाना, कैफीन , रेड मीट,वनस्पति घी, आदि खाद्य पदार्थो का सेवन ना करें. इन सभी खाद्य प्रार्थो के सेवन से थायराइड को बढ़ावा मिलता है. जिसके कारण हमें अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

थायराइड के आयुर्वेदिक उपचार...

आयुर्वेद में कुछ उपाय थायरॉइड के लिए दिए गये है जो आपको किसी भी आयुर्वेद के विशेषज्ञ के सलाह के आधार पर ही प्रयोग करना चाहिए।

- 5 किलो आटे के साथ 1 किलो बाजरा का आटा और एक किलो ही ज्वार का आटा मिलकर इस आते से बनी रोटियां खाने से आपको इस रोग में बेहद राहत मिलती है ।

- सुबह खाली पेट आप गो-मूत्र या इसके अर्क का सेवन कर सकते है और इसे लेने के एक डेढ़़ घंटे तक आपको कुछ भी नहीं खाना होता है और मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं इसे ले सकती हैं।

इसके लिए आप प्रात: काल उठकर फ्रेश होने के बाद गो मूत्र को बारीक कपडे से छानकर लें और इस दौरान आप कुछ भी फास्टफूड और तेलिय और गरिष्ट पदार्थो के सेवन से परहेज करें। चाय और काफी का सेवन भी वर्जित है। थायरॉइड के आयुर्वेदिक उपचार में यह बेहद कारगर है।

इसके अलावा मुलेठी, अश्वगंधा, गेहूं का ज्वारा, अलसी, अदरक, इचिन्सिया, बाकोपा, काले अखरोट, नींबी बाम आदि जड़ी-बूटी थायरॉइड के इलाज में लाभदायक सिद्ध होते हैं। एक बार किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से सलाह लेना आवश्यक है।

उज्जयी आसन से थायराइड में लाभ...

उज्जयी आसन जरूर करें, कम से कम रोजाना 1 बार अवश्य करें से लाभ हो सकता है, लम्बे समय तक करने से इससे अद्भुत लाभ होते देखे गए है, उज्जायी आसन से थाइरोइड पूरी तरह जड़ से खत्म हो सकता है, इसे आप नियमित रूप से जीवन का हिस्सा बना लें, अवश्य लाभान्वित होंगे!

वजन पर दें ध्यान

सोते हुए या लेते हुए भोजन न करें और न ही टीवी, कंप्यूटर इत्यादी चलाएं! आजकल लोग मोबाइल का इस्तेमाल बहूत अधिक करने लगे है लगातार लम्बे समय टेक इसका इस्तेमाल करने पर ये समस्या गंभीर रूप से बढ़ सकती है!

कोशिश करें की तकिया न लगाए और लगाना ही चाहते है तो बेहद पतली तकिया इस्तेमाल करें, जिससे गर्दन सीधीे ही रहे। हमेशा नींद पूरी लें!

इसका करें त्याग

- सिगरेट और इसके धुएं से बचे इसमे मौजूद थायनोसाईनेट थाइरोइड ग्रंथि को नुक्सान पहुचता है, शराब और किसी भी प्रकार के नशे से बचें!

- ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी नहीं खाना चाहिए ये थाइरोइड में नुक्सान दायक होते हैं। इसके अलावा हर 5-6 महीने में अपनी थाइरोइड जांच जरूर कराएं व चिकित्सक सलाह करके अपनी दवाई नियमित रूप से लें!

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।