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Avian Influenza: इंसानों के लिए कितना खतरनाक है बर्ड फ्लू, जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब?

Avian Influenza: इंसानों के लिए कितना खतरनाक है बर्ड फ्लू, जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण के बीच H5N1 वायरस से होने वाला एवियन इन्फ्लूएंजा तेजी से बढ़ रहा है। अकेले राजस्थान में 400 से ज्यादा पक्षी इस संक्रमण से अपनी जान गंवा चुके हैं। फिलहाल एवियन इन्फ्लूएंजा से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, केरल और मध्य प्रदेश है। इस प्रकार का इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन ये मनुष्यों तक भी पहुंच सकता है।

आम तौर पर वायरस से संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने पर इंसान में ये ट्रांसमिट हो सकता है। बर्ड फ्लू की बीमारी पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से इंसानों में फैल सकती है। इसके अलावा, यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी ट्रांसमिट हो सकता है। एवियन इन्फ्लूएंजा से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे खुद को दूसरों से अलग कर लें ताकि वे अन्य लोगों में एयरबॉर्न रेस्पीरेटरी ड्रॉपलेट्स के माध्यम से दूसरों में ट्रांसमिट न हो।

एवियन इन्फ्लूएंजा के लक्षण
एवियन इन्फ्लूएंजा के कुछ शुरुआती लक्षणों में खांसी, बुखार, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और सांस की तकलीफ शामिल हैं। बीमारी से संक्रमित होने के बाद आपमें लक्षण जाहिर होने में दो से सात दिनों का समय लग सकता है। ये वायरल संक्रमण बढ़कर न्यूमोनिया हो सकता है और कभी-कभी तो सांस की परेशानी भी हो सकती है। बर्ड फ्लू न्यूमोनिया का बहुत आक्रामक शक्ल की वजह बनता है जो अक्सर घातक होता है।

किन लोगों को है इस बीमारी का ज्यादा खतरा?
जो लोग पक्षियों के फार्म पर काम करते हैं, उन्हें इस बीमारी के होने का खतरा अधिक होता है। इस श्रेणी में आने वाले लोग पोल्ट्री फार्म वर्कर, एनिमल कंट्रोल वर्कर, वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट, ऑर्निथोलॉजिस्ट आदि हैं। यह सलाह दी जाती है कि इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को पक्षियों के पास जाने से पहले अपने हाथों, नाक और मुंह को ढक लेना चाहिए। इन तीन हिस्सों से ही वायरस से संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

इंसानों के लिए कितना खतरनाक और कैसे फैलता है ये वायरस?
इंसानों में इस वायरस से मृत्यु दर करीब 60% है। इंसानों में बर्ड फ्लू का पहला मामला हॉन्ग कॉन्ग में साल 1997 में आया था। बर्ड फ्लू की बीमारी पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से इंसानों में फैल सकती है। वहीं हेल्थलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पक्षियों के पूरी तरह से पके हुए मांस या अंडे खाने से ये बीमारी लोगों के बीच नहीं फैलती है। आप किसी दूषित सरफेस के माध्यम से भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं।

इलाज
एवियन इन्फ्लुएंजा के लक्षण दिखाने के दो दिनों के भीतर एंटीवायरल दवाओं का सेवन प्रभावित व्यक्ति को राहत पहुंचा सकता है। फ्लूएंजा के ह्यूमन स्ट्रेन से बचने के लिए डॉक्टर आपको फ्लू शॉट लेने की सलाह दे सकते हैं। अगर आपको एवियन फ्लू और ह्यूमन फ्लू एक ही समय पर होते हैं तो ये फ्लू का एक नया और जानलेवा रूप ले सकता है। FDA ने इसके एक वैक्सीन डिजाइन को मंजूरी दे दी है, लेकिन अभी वो लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है। एक्सपर्ट कहते हैं कि H5N1 लोगों के बीच फैलने पर ही उसका इस्तेमाल किया जाएगा।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।