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मप्र राजनीति: राज्यसभा की सीट के लिए कांग्रेस में छिड़ा द्वंद, 19 जून को है चुनाव

मप्र राजनीति: राज्यसभा की सीट के लिए कांग्रेस में छिड़ा द्वंद, 19 जून को है चुनाव

हाईलाइट

  • मप्र कांग्रेस में राज्यसभा की सीट के लिए द्वंद

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा में किसे भेजा जाए इसको लेकर कांग्रेस में द्वंद छिड़ गया है, क्योंकि दावेदार दो हैं और विधायकों की संख्या बल के आधार पर सिर्फ एक सदस्य के निर्वाचित होने के आसार है। पार्टी अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि प्राथमिकता सूची में किसे पहले स्थान पर रखा जाए।

राज्य में राज्यसभा की तीन सीटें प्रभात झा, दिग्विजय सिंह और सत्यनारायण जटिया का कार्यकाल खत्म होने से रिक्त हुई हैं। इन सीटों के लिए 19 जून को मतदान होने वाला है। इसके लिए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और दलित नेता फूल सिंह बरैया को उम्मीदवार बनाया है, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और अभी हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा डॉक्टर सुमेर सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा है।

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटेरिया का कहना है, विधानसभा में विधायकों की वर्तमान संख्या के आधार पर राज्यसभा में एक सदस्य को निर्वाचित होने के लिए 52 सदस्यों का समर्थन जरूरी है, इस स्थिति में भाजपा के पास दो सदस्यों के लिए पर्याप्त मतदाता है, क्योंकि विधानसभा में उसके 107 सदस्य हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के पास 92 विधायक हैं इसलिए कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अंदर एक ऐसा धड़ा है जो दिग्विजय सिंह के स्थान पर फूल सिंह बरैया को राज्यसभा में भेजने की पैरवी कर रहा है और आगामी समय में होने वाले उपचुनाव के लिहाज से जरूरी भी मान रहा है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पिछले दिनों एक बैठक भी की थी और उस बैठक में प्रस्ताव पारित कर पार्टी हाईकमान को सुझाव दिया गया था कि बरैया को राज्यसभा उम्मीदवारी की प्राथमिकता में पहले स्थान पर रखा जाए।

बैठक में शामिल एक कांग्रेस नेता का कहना है कि, बरैया को राज्यसभा में भेजने पर ग्वालियर-चंबल अंचल में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव में पार्टी को लाभ मिल सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में आरक्षित वर्ग के मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाली है। वहीं दूसरी ओर यह इलाका सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र भी है। इसलिए बरैया को राज्यसभा में भेजकर पार्टी खुद का दलित व आरक्षित वर्ग का हिमायती होने का प्रमाण दे सकती है।

शिवराज सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुटकी लेते हुए कहते हैं कि कांग्रेस उनकी बात तो मानेगी नहीं फिर भी बरैया ने लंबे समय तक संघर्ष किया है और उन्हें कांग्रेस को राज्यसभा में भेजना चाहिए। कांग्रेस यह मानने को तैयार नहीं है कि उसे सिर्फ एक सीट ही मिलने वाली है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का दावा है कि कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार राज्यसभा का चुनाव जीतेंगे। मगर यह खुलासा नहीं करते कि आखिर जीतेंगे कैसे।

विधानसभा में विधायकों की स्थिति पर गौर करें तो सदन की सदस्य क्षमता 230 है। इनमें से 22 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं और दो विधायकों का निधन हुआ है। कुल मिलाकर 24 स्थान रिक्त हैं। वर्तमान में 206 विधायक हैं, इनमें भाजपा के 107 कांग्रेस के 92 इसके अलावा बसपा सपा और निर्दलीय के कुल सात विधायक हैं।

राजनीतिक विश्लेषक पटेरिया कहते हैं कि भाजपा दिग्विजय सिंह का रास्ता रोकना चाहती है और इसके लिए वह कांग्रेस के अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के विधायकों के संपर्क में हैं और उन्हें इस बात के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि वे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार का समर्थन करें। कांग्रेस अगर बरैया को राज्यसभा में नहीं भेजती है तो भाजपा केा कांग्रेस पर आरक्षित वर्ग को संरक्षण न देने और उपेक्षा करने का आरोप लगाने का मौका मिलेगा। राज्य में बीते दशकों में कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जब आरक्षित वर्ग के नेता को ज्यादा समर्थन रहा मगर उन्हें नेतृत्व का मौका नहीं दिया गया।

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