SC Order For Teachers: शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, योग्यता पूरी ना होने के चलते बढ़ सकती हैं मुश्किलें

शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, योग्यता पूरी ना होने के चलते बढ़ सकती हैं मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है और कहा है कि बिना योग्यता के जॉब मिलना मुश्किल है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शिक्षकों की नौकरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम बात कही है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि स्कूल या कॉलेज में पढ़ाने वाले व्यक्ति के पास तय योग्यता होना बहुत ही अहम है। बिना किसी जरूरी योग्यता या प्रमाण के किसी भी शिक्षक या ट्यूटर को नौकरी नहीं दी जा सकती है। ऐसे लोगों को बाद में सरकारी नौकरी में शामिल करना भी आसान नहीं होगा। अदालत ने कहा है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलना उनका अधिकार है, इसलिए ही पढ़ाने वाले लोगों की योग्यता से समझौता बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है। यह मामला असम सरकार की एक योजना से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें कुछ ऐसे लोगों को भी सरकारी सेवा में लेने की बात है।

असम की योजना पर उठे सवाल

मामला असम सरकार की उस योजना से जुड़ा है, जिसमें कुछ ऐसे शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी नौकरी देने का रास्ता बनाया गया था जिनके पास तय योग्यता नहीं थी। इस योजना को राजेश चौहान ने अदालत में चुनौती दी है और उनका कहना है कि प्राइवेट स्कूलों और दूसरे शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले लोगों को बिना सही भर्ती प्रक्रिया के सीधे सरकारी नौकरी देना गलत है। उनके मुताबिक, सरकारी नौकरी में सभी लोगों को बराबर मौका मिलना चाहिए और बिना परीक्षा और साफ भर्ती प्रक्रिया के किसी को भी सीधे सरकारी सेवा में लेना संविधान के नियमों के खिलाफ हो सकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने भी उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने पूछा है कि जिन लोगों के पास जरूरी योग्यता नहीं है उन्हें पढ़ाने का काम क्यों दिया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि कुछ लोगों को शिक्षक की जगह ट्यूटर बताकर मामले को अलग दिखाने की कोशिश की जा रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने चिंता जताई और कहा कि अगर बिना सही योग्यता वाले लोग बच्चों को पढ़ाएंगे, तो इसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ सकता है।

अदालत ने असम सरकार को दिए साफ निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार और शिक्षा विभाग को कहा है कि जिन लोगों के पास जरूरी योग्यता नहीं है, उन्हें शिक्षक या ट्यूटर के पद पर नियुक्त न किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को बाद में सरकारी सेवा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए शिक्षा से जुड़े कानूनों में तय नियमों का पालन करना जरूरी होगा। अदालत ने माना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलना संविधान के तहत उनका अधिकार है।

Created On :   8 Sept 2026 3:57 PM IST

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