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मुंबई में नाले में गिरा डेढ़ साल का मासूम, अबतक कुछ पता नहीं


डिजिटल डेस्क, मुंबई। उफान पर बह रहे नाले में एक डेढ़ वर्षीय मासूम के बह जाने की घटना गोरेगांव के आंबेडकर नगर इलाके में सामने आई है। बालक के बह जाने की जानकारी उसकी मां को भी नहीं थी। सीसीटीवी कैमरे में बालक नाले में गिरता हुआ नजर आया।  नाले में बहे बालक का नाम दिव्यांश सिंह है। जानकारी के अनुसार गोरेगांव पूर्व के आंबेडकर चौक के चाल में दिव्यांश का परिवार रहता है। बुधवार की देर रात दिव्यांश खेलते-खेलते बाहर आया और सामने नाले में गिर गया। नाले में पानी का बहाव इतना तेज था कि दिव्यांश के बहने की किसी को भनक तक नहीं लगी। कुछ देर बाद दिव्यांश की मां अपने बेटे को घर के बाहर खोजने लगी लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला। सीसीटीवी कैमरा खंगालने पर दिव्यांश नाले में गिरता हुआ नजर आया । दिव्यांश की खोजबीन में अग्निशमन की टीम, पुलिस और परिसर के लोग जुटे हुए हैं लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका है। उल्लेखनीय है कि मुंबई में इन दिनों जारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। गोरेगांव का यह नाला भी उफान पर बह रहा था, जिसमें डेढ़ वर्षीय मासूम बह गया।

घटना स्थल पर पहुंचे मुंबई के महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। मीडिया से बातचीत में महाडेश्वर ने घटना के लिए मुंबईकरों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। नाले में गिरने के घंटों बाद भी प्रशासन बच्चे को ढूंढ नहीं सका तो लोगों को गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने आंबेडकर चौक पर रास्ता जाम कर दिया। दिव्यांशु रात को अपने घर से निकला और उसका पैर खुले मैन होल के पास फिसल गया और वह नाले में गिर पड़ा। घटना की तस्वीरें वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। बच्चे की मां कुछ सेकंड में बाहर आकर उसे तलाशने की कोशिश करती है, लेकिन वह कहीं नजर नहीं आता।

प्रशासन नाले के करीब 10 किलोमीटर तक तलाशी ले रहा है। महानगर पालिका, दमकल और मुंबई पुलिस की टीम बच्चे की तलाशी के काम में जुटे हुए हैं। वहीं विरोध प्रदर्शन कर रहे नाराज लोगों ने घटना के लिए मुंबई महानगर पालिका को जिम्मेदार ठहराया लेकिन महाडेश्वर ने कहा कि दिव्यांश की मां को उस पर ध्यान रखना चाहिए था। गटर बाकी जगहों पर बंद है सिर्फ जहां हादसा हुआ वहां खुला है। इस बात की जांच की जाएगी कि क्या स्थानीय लोगों ने बरसात में जमा पानी निकालने के लिए ढक्कन खोला था। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पानी निकालने के लिए और कचरा फेंकने के लिए गटर का ढक्कन खोल देते थे। मनपा लोगों ने ऐसा न करने की कई बार अपील कर चुकी है। एहतियात बरतना सबकी जिम्मेदारी है।  

पांच वर्षों में नाले में गिरने से गई 328 लोगों की जान

दिव्यांश के खुले ढक्कन चलते नाले में गिरने की वारदात के बाद महानगर में इस तरह के हादसों पर बहस शुरू हो गई है। महानगर में पिछले साढ़े पांच सालों में समुद्र, नदी, नाले और मैनहोल में लोगों के गिरने की 639 वारदातें हुईं हैं। इन हादसों में 328 लोगों ने अपनी जान गंवाईं हैं। आरटीआई के जरिए यह जानकारी सामने आई है। शकील अहमद शेख को बीएमसी से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक साल 2013 से जुलाई 2018 तक इस तरह की वारदातों में 91 महिलाओं और 328 पुरूषों की मौत हुई है। 

 

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