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148 आश्रमशालाओं पर 44.76 लाख खर्च करेगी सरकार, यौन शोषण की घटना के बाद निर्णय

148 आश्रमशालाओं पर 44.76 लाख खर्च करेगी सरकार, यौन शोषण की घटना के बाद निर्णय

डिजिटल डेस्क, गड़चिरोली। चंद्रपुर जिले के राजुरा स्थित स्कूल में आदिवासी छात्राओं के साथ दुराचार प्रकरण के बाद अब आदिवासी विकास मंत्रालय ने आश्रमशालाओं में शिक्षारत सभी विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत आश्रमशालाओं में कार्यरत शिक्षकों को जीवन कौशल पर आधारित विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षणप्राप्त शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम सरकार ने तय किया है। जिसके तहत नागपुर संभाग की कुल 148  आदिवासी आश्रमशालाओं के 592  शिक्षकों पर इस प्रशिक्षण के लिए तकरीबन 44.76  लाख रुपये की निधि खर्च होगी।

बता दें कि, पूर्वी विदर्भ के आदिवासी बहुल गड़चिरोली जिले में 50  से अधिक सरकारी और इतनी ही मात्रा में अनुदानित आश्रमशालाएं कार्यरत है। इन आश्रमशालाओं में कक्षा पहली से 12 वीं तक हजारों की संख्या में आदिवासी विद्यार्थी शिक्षारत हैं।  जिले में स्थित अधिकांश आश्रमशालाएं दुर्गम व जंगल-पहाड़ी इलाके में स्थित है। ऐसे स्थान पर आदिवासी स्टूडेंट की सुरक्षा पर लगातार प्रश्नचिन्ह लग रहा है। गत दिनों चंद्रपुर जिले के राजुरा स्थित एक स्कूल में आदिवासी छात्राओं के दुराचार का मामला उजागर हुआ था।  जिसके बाद सरकार ने गंभीर कदम उठाते हुए आदिवासी विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। इस निर्णयानुसार पूर्वी विदर्भ के नागपुर संभाग के नागपुर, वर्धा, भंड़ारा, गड़चिरोली, गोंदिया जिले की कुल 148  आदिवासी आश्रमशालाओं का इस प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया है।  इन आश्रमशालाओं में कार्यरत कुल 592  शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षकों के लिए कुल 16  विभिन्न प्रकार के गुट तैयार कर उन्हें प्र्रशिक्षित किया जाएगा। 

7 वीं से 12 वीं के स्टूडेंट्स को किया जाएगा प्रशिक्षित 
गड़चिरोली जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी निजी स्कूलों की कमी होने के कारण अधिकांश विद्यार्थी आश्रमशालाओं के भरोसे हैं। आश्रमशालाओं में 7 वीं से 12 वीं के विद्यार्थियों की संख्या हजारों पर है। ऐसी ही विद्यार्थियों को सरकार द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह विद्यार्थी आश्रमशालाओंमें छात्रावास में निवासी रूप से रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयोजित यह प्रशिक्षण भविष्य में राजुरा जैसी घटनाओं पर रोक लगा सकता है। 

यूनिसेफ के माध्यम से दिया जाएगा प्रशिक्षण 
यूनिसेफ  के माध्यम से राजमाता जिजाऊ माता और बाल स्वास्थ्य पोषण मिशन के जरिए अनुदानित आश्रमशालाओं के शिक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन चरणों में यह प्रशिक्षण आयोजित किए गए है। राज्यस्तर पर मास्टर ट्रेनर्स द्वारा शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के बाद शिक्षकों द्वारा आश्रमशालाओं में कार्यरत अधीक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसके बाद शिक्षकों व अधीक्षकों द्वारा अनुदानित आश्रमशालाओं में शिक्षारत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जीवन कौशल के साथ स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता पर यह प्रशिक्षण देने की जानकारी मिली है। 


 

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