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चेंबर में महिला कर्मचारी को मोबाइल से रिकार्डिंग करने से रोकना छेड़खानी नहीं: हाईकोर्ट

चेंबर में महिला कर्मचारी को मोबाइल से रिकार्डिंग करने से रोकना छेड़खानी नहीं: हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कार्यालय के चेंबर में वरिष्ठ अधिकारी द्वारा महिला कर्मचारी को मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग करने से रोकते समय उसका हाथ मरोड़ना और धक्का देना तथा उसे स्पर्श करना छेड़छाड़ के दायरे में नहीं आता है। बांबे हाईकोर्ट ने एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड (एयर इंडिया की सहायक कंपनी) के वरिष्ठ अधिकारी दिलीप कुमार रॉय के खिलाफ दर्ज छेड़छाड के आपराधिक मामले को रदद् करते हुए यह फैसला सुनाया है।

रॉय के खिलाफ एक महिला पायलट ने छेड़खानी का आरोप लगाया था। महिला पायलट की शिकायत की जांच करने के बाद पुलिस ने राय के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया था, जिसे रद्द करने की मांग को लेकर रॉय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 

याचिका में रॉय ने दावा किया था कि पेशेगत अनुचित आचरण के चलते महिला पायलट को सेवा से निलंबित किया गया था और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरु की गई थी।

संभवत: इसी निराशा व कुंठा के चलते  महिला पायलट ने रॉय खिलाफ एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत 20 सितंबर 2018 को मामला दर्ज कराया है। महिला पायलट जब मेरे चेंबर में अपना पहचान पत्र जमा करने के लिए आयी तो वह वहां पर मोबाइल पर वीडियो रिकार्डिंग करने लगी। यह करने से उसे रोका गया तो उसने पुलिस में शिकायत कर दी। जबकि पीड़ित महिला पायलट ने दावा किया था कि ईमेल से  त्यागपत्र भेजने के बाद जब वह रॉय के चेंबर में पहचान पत्र जमा करने गई थी तो राय ने मुझे धक्का मारा, मेरा हाथ मरोड़ा और मेरे छाती पर अनुचित तरीके से स्पर्श किया। 

मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई जानबूझकर किसी महिला पर आपराधिक इरादे से उस पर बल प्रयोग करता है अथवा हमला करता है तो ही धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इस मामले में यदि हम शिकायतकर्ता महिला पायलट के आरोपों को जस का तस भी स्वीकार कर लें तो भी याचिकाकर्ता (रॉय) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध नहीं बनता है।

मामले में आरोपी रॉय महिला को अपने चेंबर में मोबाइल रिकार्डिंग करने से रोक रहे थे। रिकार्डिंग करने से रोकते समय संभवत: रॉय ने शिकायतकर्ता को धक्का दिया होगा। हो सकता रॉय ने महिला को धक्का देते समय अपने बल का प्रयोग किया है औैर उनका हाथ महिला की छाती में लग गया हो लेकिन ऐसा करते समय रॉय का इरादा छेड़खानी करने का नहीं था। उन्हें इस बात का भी ऐहसास नहीं था कि उनके इस कृत्य से महिला के साछ छेड़खानी हो जाएगी।

इसलिए आरोपी के छेड़खानी करने के आशय के अभाव में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले और आरोपपत्र को रद्द किया जाता है। चूंकी आरोपी ने महिला को धक्का दिया है इसलिए यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत आता है इसलिए शिकायतकर्ता आरोपी के खिलाफ इस धारा के तहत मामला दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र है।

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