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मालेगांव बम धमाका मामले में दो डॉक्टरों की गवाही, तीन तलाक मामले में अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 04th, 2018 00:19 IST

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मालेगांव बम धमाका मामले में दो डॉक्टरों की गवाही, तीन तलाक मामले में अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित

डिजिटल डेस्क, मुंबई। साल 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की स्पेशल कोर्ट में दो डॉक्टरों की गवाही हुई। इसके साथ ही इस मामले के मुकदमे की सुनवाई की शुरुआत भी हो गई। गवाही देनेवाले एक डाक्टर ने धमाके में मारे गए लोगों की पोस्टमार्ट तैयार की थी जबकि दूसरे डाक्टर ने धमाके से प्रभावित एक पीड़ित को देखा था और उसे बधीर होने का प्रमाणपत्र भी जारी किया था। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अविनाश रसाल ने इन डॉक्टरों से पूछताछ की अब अगली सुनवाई के दौरान यानी 4 दिसंबर को बचावपक्ष इन डॉक्टरों से जिरह करेगा।

इस बीच जस्टिस विनोद पडलकर ने सुनवाई के दौरान आरोपी सुधाकर द्विवेदी के वकील के अनुपस्थित रहने के लिए ढाई हजार रुपए का जुर्माना लगाया। गौरतलब है कि NIA की स्पेशल कोर्ट में इस धमाके से जुड़े सात आरोपियों के खिलाफ 30 अक्टूबर को आरोप तय किए गए थे। जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए उसमे कर्नल प्रसाद पुरोहित,साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,समीर कुलकर्णी,सेवानिवृत्त मेजर रमेश उपाध्याय,सुधाकर चतुर्वेदी,अजय रहिरकर व सुधाकर चतुर्वेदी का नाम शामिल है। इस  धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हो गए थे। इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान भी हुआ था।

तीन तलाक का मामला
इसके अलावा बांबे हाईकोर्ट ने तीन तलाक के जरिए पत्नी से अलग होने के मामले में आरोपी पति के अग्रिम जमानत आवेदन पर फैसला सुरक्षित कर लिया है। आरोपी इंतखाब आलम मुंशी के खिलाफ उसकी पत्नी ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में दावा किया गया है कि सरकार ने तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया है। इसलिए उसके पति का कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है। केंद्र सरकार ने 19 सितंबर 2018 को अध्यादेश के माध्यम से तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया था और इसे अपराध की श्रेणी में शामिल किया था। अध्यादेश में सजा के तौर पर तीन साल के कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

जस्टिस पीडी नाइक के सामने आरोपी के जमानत आवेदन सुनवाई हुई। इस दौरान आरोपी के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल ने तलाक की सूचना को लेकर शिकायतकर्ता को पहले दो नोटिस दिए थे और फिर एक तीसरा नोटिस दिया था। यह नोटिस नियमों के तहत दिए गए है। वहीं पीड़ित महिला के वकील ने कहा कि आरोपी की ओर से भेजे गए उसे पहले दो नोटिस मिले ही नहीं। इसके अलावा सत्र न्यायालय ने भी आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया है। मामले से जुड़े दंपति का 1988 में विवाह हुआ था और उनके तीन बच्चे है। जस्टिस ने फिलहाल दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। वे मंगलवार को अपना फैसला सुना सकते है।

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