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देश के पहले मल्टीलेयर ब्लास्ट का गवाह बना एनसीएल, चिरप्रतीक्षित प्रयोग निगाही में हुआ

September 24th, 2018 18:44 IST
देश के पहले मल्टीलेयर ब्लास्ट का गवाह बना एनसीएल, चिरप्रतीक्षित प्रयोग निगाही में हुआ

डिजिटल डेस्क, सिंगरौली (मोरवा)। कोल इंडिया की ओपन कास्ट माइंस के इतिहास में आज का दिन यादगार रहेगा। दशकों से चली आ रही ब्लास्टिंग पद्धति को इस दिन एक नया आयाम मिल गया। इसका गवाह बना ICL। हर दिन कोयला निकालने के लिये पहले ओबर बर्डेन को ब्लास्ट के जरिये निकालना और उसके उपरांत कोयले की सीम को ब्लास्ट करने की बजाय दोनों को एक ही बार ब्लास्ट करके कोयला उत्पादन की नई तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण ICL की निगाही खदान में IIT (ISM) और CMPDI रांची की एक विशेषज्ञ टीम के द्वारा सफलता पूर्वक सम्पन्न किया गया।

सोमवार को खडिय़ा ओपन कास्ट माइंस में तीसरा ब्लास्ट किया गया। इसके पहले रविवार की दोपहर दो तीन घंटे तक अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रिानिक, डिजिटल डेटोनेटर्स और एक स्मार्ट डिजाइन की मदद् से किया गया, जो पूर्णतया सफल रहा। इस प्रयोग के बाद अब भविष्य में कोयले की ओपन कास्ट माइंस में इसी ब्लास्टिंग सिस्टम से कोयले का उत्खनन किया जा सकेगा। देश में इस प्रकार का पहला प्रयोग ICL की निगाही खदान में बीते 2 सितम्बर को किया गया था। जिसके सकारात्मक नतीजे आने के बाद रविवार को दूसरी बार मल्टी लेयर ब्लास्टिंग की गई और कम समय में अधिक कोयला उत्खनन की तकनीक का प्रयोग सफल रहा।

CIL से मिली थी स्वीकृति
मल्टीलेयर स्टे्रटा ब्लास्ट ऑफ ओवरबर्डेन एंड कोल के इस प्रोजेक्ट को कोल इंडिया लिमिटेड से स्वीकृति मिली थी, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाना था कि ओवर बर्डेन और कोयले में एक साथ ब्लास्टिंग करने पर दोनों आपस में मिक्स न हो जाय। इस तकनीक का इस्तेमाल करने पर यह सुनिश्चित किया जा सका कि एक बार में दोनों ही सतहों पर ब्लास्टिंग की जा सकती है। जिससे कोयला उत्खनन के लिये ओवर बर्डेन के लिये अलग और कोयला उत्खनन के  लिये अलग ब्लास्ट करने की जरूरत नहीं होगी। इस प्रयोग के लिये ICL सीएमडी पीके सिन्हा ने व्यक्तिगत रूचि दिखाते हुए विशेषज्ञ टीम को एनसीएम में आमंत्रित किया था।

...और भी होगा अध्ययन
इस तकनीक का आगे भी अध्ययन किया जा रहा है जिसके लिये सोमवार को खडिय़ा ओपन कास्ट माइंस में तीसरा ब्लास्ट किया गया। उसके उपरांत इसमें उपयोग की जाने वाली तकनीक को अगले कई महीनों तक डेवलॅप किया जायेगा। जिसके बाद ही इसे व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल करने के लिये स्वीकृति ली जायेगी। इसमें धनबाद के ISM, रांची व जयंत की CMPDI की टीम तथा ICL प्रबंधन की पूरी टीम ने सहयोग प्रदान किया है।

ये होंगे फायदे
मल्टी लेयर स्ट्रेटा ब्लास्ट की तकनीक की जानकारी देेते हुए IIT (आइएसएम) धनबाद के प्रोफेसर अरविन्द मिश्रा बताते हैं कि भविष्य में इस तकनीक के आ जाने से कोयला उद्योग में बड़े पैमाने पर खर्च को बचाया जा सकेगा। इसमें समय की भी बचत होगी और एक्स्प्लोसिव के कंजम्प्शन को कम कर प्रदूषण जैसी स्थितियों में कमी लायी जा सकेगी। ICL के पीआरओ सीरज सिंह ने बताया कि यह तकनीक कोयला उत्खनन के लिये एक नया आयाम खोलेगी।

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