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स्वच्छता में 500 शहरों में पिछड़ा नागपुर, समस्या का हल नहीं निकला तो लोगों ने उपयोग बंद कर दिया

November 15th, 2018 14:10 IST
स्वच्छता में 500 शहरों में पिछड़ा नागपुर, समस्या का हल नहीं निकला तो लोगों ने उपयोग बंद कर दिया

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मेट्रो सिटी बनने जा रही संतरानगरी का सफाई के मामले में दुखद पहलू सामने आया है। देशभर में एक ओर जहां स्वच्छ शहरों में आगे बढ़ने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नागपुर में मनपा के नाकारा अफसरों और उचित प्रबंधन के अभाव में शर्मसार स्थिति सामने आई।  हम स्वच्छता जागरूकता के मामले में देश के 500 शहरों से पीछे हो गए हैं। दरअसल केंद्र द्वारा सभी शहरों के नागरिकों की स्वच्छता में भागीदारी के लिए लिए स्वच्छता एप बनाया गया है। इसका मकसद था कि लोग आस-पास फैली गंदगी की फोटो और जानकारी मनपा को भेजें और मनपा तत्काल इसका समाधान करे, जिससे शहर को स्वच्छ बनाया जा सके, मगर मनपा ने शिकायतों का समाधान नहीं किया। इससे 2018 में किसी ने भी  यह एप डाउनलोड नहीं किया। 2017 में उत्साह में 50 हजार से अधिक लोगों ने इस एप को डाउनलोड किया था। इससे शहर की रैंकिंग में फर्क पड़ा है। यही कारण था कि हम पिछले साल स्वच्छता की रैंकिंग में 20 शहरों में शामिल हो पाए थे।   

 समाधान नहीं हुआ,  तो लोगों ने उपयोग बंद किया
नागपुर मनपा  ने 2016 में स्वच्छता एप लांच किया और बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था। जगह-जगह पथनाट्य सहित अनेक कार्यक्रम किए थे। एप पर फोटो डाउनलोड करने के बाद तुरंत उसका निराकरण हो रहा था, जिसके बाद नागपुर स्वच्छता एप डाउनलोडिंग के मामले में 20 शहरों में शामिल हो गया था, लेकिन पिछले एक साल में मनपा ने ऐसी कोई मुहिम नहीं चलाई। जो समस्याओं की फोटो भेज रहे हैं, उनकी समस्याओं का निराकरण भी नहीं हो रहा है। ऐसे में लोगों ने फोटो भेजना बंद कर दिया है। किसी नागरिक ने एप भी डाउनलोड नहीं किया है। ऐसे में नागपुर स्वच्छता एप डाउनलोड मामले में 500 शहरों में पीछे चला गया है। वह अब 509वें स्थान पर है। इसका असर आगामी दिनों में शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी पड़ सकता है। 

शुरुआत में कार्रवाई हुई, एप डाउन लोड 50 हजार पर पहुंचा
केंद्र सरकार की शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्मार्ट सिटी को लेकर कई मानक तैयार किए गए हैं। मनपा ने इसमें बड़े पैमाने पर काम किया। तत्कालीन आयुक्त श्रावण हर्डीकर ने स्वच्छता को लेकर मुहिम चलाई। इसके बाद अश्विन मुद्गल भी सड़कों पर उतरकर लोगों को जागरूक किए। 2016 में लांच किए गए एप को नागरिकों तक पहुंचाने के लिए शहर के प्रत्येक चौराहों पर पथनाट्य कर अभियान चलाया गया। इसका असर रहा कि पहले साल ही 3 हजार लोगों ने इस एप को डाउनलोड किया। तत्कालीन मनपा आयुक्त अश्विन मुद्गल व उपायुक्त जयंत दांडेगावकर द्वारा एप की खुद निगरानी करने से नागरिकों द्वारा भेजी गई फोटो पर तुरंत कार्रवाई हो रही थी। 2017 में एप डाउनलोड करने वालों की संख्या 50 हजार के पार पहुंच गई। इसके सहारे मनपा की स्वच्छता रैंकिंग भी सुधरी। एप डाउनलोड मामले में नागपुर 20 शहरों के अंदर शामिल हो गया। इतना ही नहीं  स्वच्छता रैंकिंग में 55वें स्थान पर पहुंच गया। 

मिला था पुरस्कार
सफाई कर्मचारियों को रिस्ट वॉच देने से मनपा को इनोवेटिव आइडिया का पुरस्कार भी मिला। नागपुर की इस उपलब्धि का देश के अन्य शहरों ने भी क्रियान्वयन किया। इसके बाद मनपा आयुक्त अश्विन मुद्गल व उपायुक्त जयंत दांडेगावकर का तबादला हो गया। इसके बाद स्वच्छता को लेकर कोई कार्यक्रम नहीं किए। समस्याओं की फोटो पर ध्यान नहीं दिया गया। हालात यह हैं कि वर्ष 2018 में किसी नागरिक ने स्वच्छता एप को डाउनलोड नहीं किया है, जिसका असर अब स्वच्छता रैकिंग पर होता दिख रहा है।

2019 का स्वच्छता सर्वेक्षण कठिन होगा 
पिछले 6 महीने से स्वच्छता एप एक तरह से बंद है। कोई गतिविधि नहीं हो रही है। हम लोगों के पास गए थे, जनजागरण किया था। लोगों को अच्छा प्रतिसाद मिला था, लेकिन जहां से शुरू किए थे, फिर वहीं लौट आए हैं। शून्य से शुरू करना होगा। शायद 2019 का स्वच्छ सर्वेक्षण शहर के लिए कठिन होगा। 
-सुरभि जैस्वाल, पर्यावरणविद् 

स्वच्छ भारत मिशन हमारे लिए महत्वपूर्ण 
स्वच्छ भारत मिशन हमारे लिए महत्वपूर्ण है। यह स्थिति चिंताजनक है। नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस मामले में अवेयरनेस कार्यक्रम बढ़ाकर योजनाओं को लोगों तक ले जाया जाएगा। स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। -नंदा जिचकार, महापौर 
 

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