‘मेक इन इंडिया’ के 12 वर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सात गुना और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 32 गुना बढ़ी

‘मेक इन इंडिया’ के 12 वर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सात गुना और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 32 गुना बढ़ी
देश में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम को शुक्रवार को 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस योजना को 25 सितंबर, 2014 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य देश को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन में ग्लोबल बनाना है।

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। देश में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम को शुक्रवार को 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस योजना को 25 सितंबर, 2014 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य देश को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन में ग्लोबल बनाना है।

इस योजना के आने के बाद से देश के कई सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। वहीं, ऑटोमोबाइल और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले सात गुना बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मोबाइन फोन उत्पादन करीब 32 गुना बढ़कर 6.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पहले 18,900 करोड़ रुपए था। अब वॉल्यूम के हिसाब से देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर बना गया है।

कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 2025-26 में करीब 15.8 गुना बढ़ा है।

देश में कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 में 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170.0 मिलियन टन हो गया है।

वहीं, वाहनों का उत्पादन 2014-15 के मुकाबले 2024-25 में 33 प्रतिशत बढ़कर 31.03 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गया है। इस दौरान यात्री और वाणिज्यिक वाहनों का उत्पादन 65 प्रतिशत बढ़ा है। दोपहिया वाहनों का उत्पादन 30 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों का उत्पादन 71 प्रतिशत बढ़ा है।

इसके अलावा, भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें स्थान पर है। पिछले पांच वर्षों में 9.2 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ते हुए, 2025-26 में सालाना टर्नओवर 5,08,630 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। 2025-26 के दौरान फार्मास्युटिकल निर्यात 2,62,697 करोड़ रुपए रहा है।

मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन 48.2 प्रतिशत बढ़ा है यह 2019-20 में करीब 28,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 41,500 करोड़ रुपए हो गया।

भारतीय रेलवे ने 2014-24 के दौरान 54,809 कोच बनाए। रेलवे कोच का औसत सालाना उत्पादन 2004-14 के दौरान 3,300 से कम था, जो 2014-24 में बढ़कर 5,481 हो गया।

घरेलू उत्पादन में लोकोमोटिव और आधुनिक यात्री कोच भी शामिल हैं। 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव बनाए।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) ने 2022-23 और 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की। यह मेक इन इंडिया के तहत देश की तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दिखाता है।

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Created On :   25 Sept 2026 1:34 PM IST

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