ऑटो से चलना संघर्ष नहीं, जिंदगी है जीशु सेनगुप्ता

ऑटो से चलना संघर्ष नहीं, जिंदगी है  जीशु सेनगुप्ता
मायानगरी मुंबई को 'सपनों का शहर' कहा जाता है, जहां हर साल हजारों लोग सुनहरे भविष्य और सफलता की चाह में कदम रखते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जो पहले अपने गृह राज्य में ही अनुभव और हुनर हासिल करते हैं, ताकि मुंबई के कड़े संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर सकें। लोकप्रिय अभिनेता जीशु सेनगुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

मुंबई, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। मायानगरी मुंबई को 'सपनों का शहर' कहा जाता है, जहां हर साल हजारों लोग सुनहरे भविष्य और सफलता की चाह में कदम रखते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जो पहले अपने गृह राज्य में ही अनुभव और हुनर हासिल करते हैं, ताकि मुंबई के कड़े संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर सकें। लोकप्रिय अभिनेता जीशु सेनगुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

अभिनेता ने हाल ही में आईएएनएस के साथ खास बातचीत में बताया कि बॉलीवुड में आना उन्हें उतना मुश्किल नहीं लगा, जितना लोग सोचते हैं। दरअसल, अभिनेता बंगाली सिनेमा का जाना-माना नाम है और उन्होंने कई अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया है।

अभिनेता ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि पहले वे कई बंगाली फिल्ममेकर्स के साथ काम कर चुके थे, जिस वजह से बॉलीवुड में उन्हें उतनी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्होंने कहा, "मैंने प्रदीप सरकार, अनुराग बसु, सुजॉय घोष और सुजीत सरकार जैसे जाने-माने बंगाली डायरेक्टर्स के साथ काम किया है। वे बॉलीवुड में भी काफी मशहूर हैं। ये लोग जानते थे कि मैं किस तरह का काम करता हूं। इसलिए यहां मेरे लिए चीजें काफी आसान रहीं।"

जीशु ने कहा कि वे आम अनुभवों को संघर्ष नहीं बल्कि, जिंदगी का सामान्य हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा, "यह आपके नजरिए की बात है। मैं ऑटो से जाने को संघर्ष नहीं समझता। लाखों-करोड़ों लोग रोज इसी तरह सफर करते हैं। मैं चाहूं तो इसे घुमा-फिराकर कह सकता हूं कि मैंने बहुत संघर्ष किया, लेकिन मैं इसे उस तरह नहीं देखता। इसलिए मेरे हिसाब से मैंने कोई संघर्ष नहीं किया है।"

अभिनेता ने यह भी बताया कि उनके मैनेजर ने उन्हें बॉलीवुड में बड़ा कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, "मेरी टीम ने यहां तक आने पर मुझे बहुत मजबूर किया था, खासकर मेरी मैनेजर ने। मुझे बहुत प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मुझे अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना चाहिए और बंगाल के बाहर भी काम शुरू करना चाहिए। शुरू में मैं इसके लिए ज्यादा उत्सुक नहीं था, क्योंकि मैं अपनी दुनिया में बहुत खुश था। लेकिन अब मुझे खुशी है कि मैंने यह कदम उठाया।"

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Created On :   1 April 2026 9:39 AM IST

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