भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं, जातिवादी मानसिकता के लोग कर रहे समर्थन जीतनराम मांझी

भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं, जातिवादी मानसिकता के लोग कर रहे समर्थन  जीतनराम मांझी
बिहार के भोजपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर बयानबाजियों का दौर जारी है। एनडीए के कई नेता जहां इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी पुलिस को क्लीनचिट देते नजर आ रहे हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार को दावा करते हुए कहा कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था। उन्होंने कहा कि जातिवादी मानसिकता के लोग उनका समर्थन कर रहे हैं।

पटना, 23 जून (आईएएनएस)। बिहार के भोजपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर बयानबाजियों का दौर जारी है। एनडीए के कई नेता जहां इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी पुलिस को क्लीनचिट देते नजर आ रहे हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मंगलवार को दावा करते हुए कहा कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था। उन्होंने कहा कि जातिवादी मानसिकता के लोग उनका समर्थन कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि पूर्व में भी आपराधिक मामलों को लेकर उनकी गिरफ्तारी हो चुकी थी। जीतनराम मांझी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "दलितों का एंकाउंटर हो तो “नक्सली था मारा गया”, मुसलमान का एंकाउंटर हो तो “आतंकवादी था मारा गया”, ऐसा कहने वाले लोग ही भरत तिवारी के एंकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल कहां से आया?"

जीतनराम मांझी ने लिखा, "किन लोगों की शह पर इस आपराधिक वारदात पर राजनीति हो रही है? देश संविधान से चलेगा या फिर अवैध पिस्टल की नोक से? भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था, जिसका जातिवादी मानसिकता के लोग समर्थन कर रहे हैं। भरत तिवारी पूर्व में भी आपराधिक मामलों को लेकर गिरफ्तार हो चुका था।"

उन्होंने तंज कसते हुए आगे लिखा कि "लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है, तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है।" बता दें कि इससे पहले भी उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया था। उन्होंने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति हथियार लेकर पुलिस के सामने खड़ा हो जाए, तो पुलिस के पास कार्रवाई करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता।

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने स्पष्ट किया कि पुलिस पर लगातार सवाल उठाने से कानून-व्यवस्था कमजोर होती है और इससे पुलिसकर्मियों का मनोबल भी प्रभावित होता है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

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Created On :   23 Jun 2026 2:41 PM IST

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