बिहार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन तंत्र साधना से लेकर वैदिक साधना के लिए थावे मंदिर पहुंचे लाखों भक्त

बिहार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन तंत्र साधना से लेकर वैदिक साधना के लिए थावे मंदिर पहुंचे लाखों भक्त
बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित थावे मंदिर एक प्रमुख और जागृत शक्तिपीठ है। यह मंदिर मां दुर्गा के 'थावे वाली माता' या 'सिंहासिनी देवी' रूप को समर्पित है, जहां भक्त नारियल, चुनरी और पेड़ा चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। यहां साल भर भीड़ रहती है, लेकिन नवरात्र में विशेष रौनक होती है।

गोपालगंज, 19 मार्च (आईएएनएस)। बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित थावे मंदिर एक प्रमुख और जागृत शक्तिपीठ है। यह मंदिर मां दुर्गा के 'थावे वाली माता' या 'सिंहासिनी देवी' रूप को समर्पित है, जहां भक्त नारियल, चुनरी और पेड़ा चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। यहां साल भर भीड़ रहती है, लेकिन नवरात्र में विशेष रौनक होती है।

बिहार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में गुरुवार को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंगला आरती श्रृंगार के बाद मां सिंहासन का दरबार आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। सुबह से ही यह पूरा परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा। भक्तों की कतार सुबह मंगला आरती के समय से ही लग गई थी। भक्त माला-फूल, नारियल-चुनरी और प्रसाद लिए सिंहासन मंदिर में पहुंचने के बाद श्रद्धाभाव से शीश झुकाते नजर आए।

नेपाल, यूपी, बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों की आस्था तेज धूप भी नहीं डिगा सकी। कतार में लगे भक्तों का कदम गर्भगृह की ओर दिनभर बढ़ता जा रहा था।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित संजय पांडेय ने बताया कि मां के दर्शन मात्र से ही रोग, शोक, कष्ट का नाश होता है। सुख, समृद्धि, शांति, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। थावे दुर्गा मंदिर की स्थापना की कहानी भी काफी रोचक है। कहा जाता है कि चेरो वंश के राजा मनन सिंह के राज में अकाल पड़ गया। वहीं, भक्त रहषु लोगों को बाघ से दौनी कर चावल देने लगा। बात जब राजा तक पहुंची तो उसे विश्वास नहीं हुआ। राजा ने रहषु का विरोध किया और उसे पाखंडी कहा और अपनी मां को यहां बुलाने के लिए कहा।

इस पर रहषु ने राजा से कहा कि यदि माता यहां आईं तो वह राज्य का नाश कर देंगी। रहषु भक्त के आह्वान पर देवी मां कामरूप कामाख्या से चलकर पटना और सारण के आमी से होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंचीं। माता ने रहषु का मस्तक चीर कर कंगन का दर्शन कराया जिसके बाद जिद्दी राजा की सभी इमारतें ढह गईं। राजा की मृत्यु हो गई। इस मंदिर में भक्त रहषु की भी प्रतिमा है, जहां मां की पूजा के बाद पूजा करने जाते हैं और उनका भी आशीर्वाद लेते हैं।

मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, मां सिंहासिनी के दरबार में सतचंडी, सप्तशती और विभिन्न अनुष्ठानों की शुरुआत संकल्प के साथ शुरू हो गई। सैकड़ों की संख्या में आचार्यों और पुजारियों के द्वारा वेद मंत्रों का उच्चारण हो रहा है। दूर-दूर से आए साधकों ने भी अपना अनुष्ठान शुरू कर दिया है। तंत्र साधना से लेकर वैदिक साधना तक की जा रही है। नवरात्र को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। थावे में मां सिंहासिनी के दर्शन के लिए रात के दो बजे से ही भक्तों की कतार लग गई थी। मंदिर का पट खुला तो प्रशासन के अधिकारियों ने भीड़ को संभाला। सुरक्षित दंडाधिकारी के रूप में बीडीओ अजय प्रकाश राय और थानाध्यक्ष विभा कुमारी मंदिर के प्रवेश द्वार पर जमे रहे।

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Created On :   19 March 2026 5:53 PM IST

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