ब्राजील में चुनाव से पहले लूला का बड़ा फैसला, फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग पर लगाई रोक

ब्राजील में चुनाव से पहले लूला का बड़ा फैसला, फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग पर लगाई रोक
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण से महज कुछ दिन पहले एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने देश में फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया। लूला सरकार का कहना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से परिवार बर्बाद हो रहे हैं, लोग कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। यही वजह है कि इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था।

रियो डी जेनेरियो, 26 सितंबर (आईएएनएस)। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण से महज कुछ दिन पहले एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने देश में फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया। लूला सरकार का कहना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से परिवार बर्बाद हो रहे हैं, लोग कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। यही वजह है कि इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था।

लूला ने शुक्रवार को एक अस्थायी कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 'फिक्स्ड-ऑड्स बेटिंग' के संचालन, पेशकश, मध्यस्थता और विज्ञापन पर रोक लगा दी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, इसे स्थायी रूप से लागू रखने के लिए 120 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।

इस फैसले का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण के लिए 4 अक्टूबर को मतदान होना है। लूला खुद दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो शामिल हैं।

लूला ने अपने फैसले को परिवारों को ऑनलाइन सट्टेबाजी से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने की कोशिश बताया है। साओ पाउलो में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इसे ‘कठोर, निर्णायक और जरूरी कदम’ बताया। उन्होंने सट्टेबाजी की तुलना कैंसर से करते हुए कहा कि ट्यूमर को निकालना पड़ता है, वरना वह शरीर को खत्म कर सकता है।

सरकार के आदेश के मुताबिक, सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर नए पैसे जमा करने पर रोक लगा दी गई है। मौजूदा उपयोगकर्ताओं को अपने खातों में मौजूद रकम निकालने के लिए 5 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। 6 अक्टूबर से सट्टेबाजी की वेबसाइट और ऐप बंद किए जाने हैं। इसके बाद कंपनियों को बचे हुए खातों की जानकारी वित्तीय संस्थानों को देनी होगी और बैंकों के जरिए उपयोगकर्ताओं को उनकी रकम लौटाई जाएगी।

लूला सरकार ने केवल मौजूदा सट्टेबाजी कारोबार को बंद करने का फैसला नहीं किया है, बल्कि फिक्स्ड-ऑड्स बेटिंग से जुड़े कुछ कार्यों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए कांग्रेस में एक विधेयक भी भेजने की तैयारी की है। इसमें सट्टेबाजी को बढ़ावा देने और लोगों के निजी डेटा का इस्तेमाल कर उन्हें सट्टा लगाने के लिए आकर्षित करने जैसी गतिविधियों पर सख्ती का प्रस्ताव है।

ब्राजील के सूचना सेवा मंत्रालय के अनुसार, फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग को 2018 में कानूनी आधार मिला था, लेकिन इसका नियमन और लाइसेंसिंग ढांचा बाद में विकसित हुआ। लूला के मौजूदा कार्यकाल में इस क्षेत्र को औपचारिक रूप से नियंत्रित बाजार के रूप में आगे बढ़ाया गया और कंपनियों को लाइसेंस दिए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 85 लाइसेंस दिए गए हैं और कंपनियों से लाइसेंस शुल्क के रूप में कुल 2.55 अरब रियाल प्राप्त हुए हैं।

यही वजह है कि सरकार के ताजा फैसले से सट्टेबाजी उद्योग पर भी असर पड़ा है। उद्योग संगठनों ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को अदालत में चुनौती दे सकते हैं। उनका कहना है कि सरकार ने कुछ ही समय पहले जिस नियामकीय ढांचे के तहत कंपनियों को लाइसेंस दिया था, उसे अचानक खत्म करने से कंपनियों के निवेश और लाइसेंस शुल्क से जुड़े मुआवजे के सवाल खड़े होंगे।

इस फैसले का एक राजनीतिक पहलू भी है। चुनाव से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय ऐसे समय आया है जब ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर ब्राजील में सार्वजनिक बहस तेज है। लूला लंबे समय से इस उद्योग की आलोचना कर रहे हैं और इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उन्होंने ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह उद्योग लोगों की लत से मुनाफा कमाता है और परिवारों को नुकसान पहुंचा रहा है।

लूला के मुख्य प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो ने इस फैसले को चुनावी कदम बताया है। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक को ब्राजील में व्यापक जनसमर्थन मिलने की बात सामने आई है।

ब्राजील में ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते कारोबार को लेकर चिंता उस समय और बढ़ी जब खेल आयोजनों और खासकर फुटबॉल से जुड़े विज्ञापनों में बेटिंग कंपनियों की मौजूदगी काफी बढ़ गई। सरकार का तर्क है कि आसान ऑनलाइन पहुंच ने बड़ी संख्या में लोगों को सट्टेबाजी की ओर आकर्षित किया और कुछ परिवारों पर इसका आर्थिक असर पड़ा।

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Created On :   26 Sept 2026 4:36 PM IST

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