सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उद्धव-कांग्रेस का मोर्चा, भाजपा बोली- घुसपैठियों को बचाना चाहता है विपक्ष
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के फैसले ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा दिया है। एक तरफ शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस सीईसी के खिलाफ मोर्चा खोलकर उनके फैसले को सत्ता पक्ष के इशारे पर उठाया गया कदम बता रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ महायुति सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के विरोध को वोट बैंक की राजनीति करार दिया है।
महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता की हत्या के मामले में कहा, "निश्चित तौर पर यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमने जांच को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच पर किसी भी तरह का दबाव या प्रभाव नहीं होना चाहिए, इसकी गारंटी है। पुलिस हर एंगल से जांच करेगी। अभी कोई भी अटकल लगाना गलत होगा, जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।"
उन्होंने आगे कहा कि परिवार से भी हमारी अपील है कि वे निश्चिंत रहें। जिसने भी यह हत्या की है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। जैसा कि आप जानते हैं, इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है और जैसे-जैसे जांच में तथ्य सामने आएंगे, वैसे-वैसे कार्रवाई की जाएगी।
आदित्य ठाकरे के बयान पर पलटवार करते हुए मंत्री योगेश कदम ने कहा, "वो जब मंत्री थे, तब एक बड़े उद्योगपति के घर के नीचे जेलाटीन मिला था। वह किसने रखा था, उसकी जांच अभी भी जारी है, लेकिन जिनके जरिए वह रखा गया था, उस अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद उन्होंने ही अपने साथ जोड़ लिया था। इसलिए उनकी ऐसी बातें करना मजाक है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने अभी जांच शुरू ही की है। जिन्होंने यह वारदात की है, उनके पास हथियार कहां से आए, उन्हें कहां से मिले, इन सभी बिंदुओं पर जांच होगी और इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उद्धव ठाकरे के विरोध प्रदर्शन को लेकर योगेश कदम ने कहा, "यह पूरा विरोध प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ हमारी महायुति या एनडीए सरकार में हो रहा है। पिछली बार जब एसआईआर हुआ था, तब कांग्रेस की सरकार थी। मेरे ख्याल से हर 24 साल में यह प्रक्रिया की जाती है, इसलिए यह जरूरी है।"
उन्होंने कहा कि आपने देखा होगा कि जब ईवीएम नहीं थी और बैलेट पेपर से वोटिंग होती थी, तब बड़े पैमाने पर फर्जी और डमी वोटिंग होती थी। इसकी वजह यही थी कि जो व्यक्ति वहां रह ही नहीं रहा है, जो वहां से शिफ्ट होकर कहीं और चला गया है, उसका नाम अभी भी वहीं मौजूद है। कई बार एक ही व्यक्ति का नाम दो-तीन शहरों में दिखता है। इस तरह की फर्जी वोटिंग रुकनी चाहिए।
कदम ने आगे कहा, "आपको पता है कि भारत में जो अवैध घुसपैठ हुई है, उनमें से कई लोगों के नाम आज वोटर लिस्ट में आ गए हैं। उन्हें हटाया जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "तीसरी बात देखिए, इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना मेरी नजर में मूर्खता है, क्योंकि यह एक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग ने इसके लिए बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) नियुक्त किए हैं और हर पार्टी ने अपना बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त किया है। आपका बीएलए वहां है, शिवसेना के कार्यकर्ता हैं, यूबीटी के कार्यकर्ता हैं और मनसे के कार्यकर्ता हैं। जब यह प्रक्रिया चल रही थी, तब आपने आपत्ति क्यों नहीं जताई? जब आपको अधिकार दिया गया है, बीएलए को बीएलओ के साथ घर-घर जाने का भी अधिकार दिया गया है। जब बीएलओ घरों का दौरा कर रहे थे या यदि आपको लगा कि बीएलओ ने गलत काम किया है, तब आपने आपत्ति क्यों नहीं की?"
कदम ने कहा, "अभी भी जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें सुनवाई का मौका दिया गया है। आप दस्तावेज पेश कीजिए। भारत में कहीं का भी निवास प्रमाण या जो भी दस्तावेज मांगे गए हैं, उनमें से तीन दस्तावेज दे दीजिए, आपका नाम वापस लिस्ट में आ जाएगा।"
विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा, "प्रोटेस्ट तो नहीं है, वह तो उनके माथे पर 'जेल भरो' जैसी बातें कर रहे हैं। अब जो भी लोग मुंबई पहुंचे हैं, मुंबई पुलिस उनसे कैसे निपटेगी? देखिए, छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर जो शिवाजी पार्क है, वहां कभी भी आंदोलन की इजाजत नहीं दी जाती है, यह बात उन्हें पता है।"
वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा छह मांगें उठाए जाने पर भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा, "ठीक है, उन्हें लगता है कि सारे नियम-कानून तोड़कर 60 साल तक उनके नेता सत्ता में रहे। सबने देखा है कि देश में बिना कैबिनेट की मंजूरी के आपातकाल लगाया गया, संविधान को कुचला गया, नेताओं को जेल में डाला गया, सिर्फ एक व्यक्ति को सत्ता बनाए रखने के लिए। उसी तरह कांग्रेस के नेता चाहते हैं, उन्हें लगता है कि सत्ता पर सिर्फ उनका हक है। एक गरीब परिवार में पैदा हुआ व्यक्ति सत्ता में कैसे आ गया, इसलिए वे इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।"
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि कांग्रेस को इस बात का दर्द है कि जिन्हें वह अपना वोट बैंक मानती है, एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से ऐसे कई फर्जी वोट हटाए गए हैं। यह पहली बार नहीं हुआ है। 2013 में देखें तो लाखों वोट हटाए गए थे, क्योंकि वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण होना जरूरी है। अगर उसमें फर्जी वोट हैं, घुसपैठियों के वोट हैं, तो यह एक तरह से हमारे देश के नागरिकों के हक पर डाका डालने जैसा है।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इससे बचाने का काम किया है। इसी से उन्हें तकलीफ हो रही है, क्योंकि उस वोट बैंक के जरिए उन्हें सत्ता में आने से रोका जा रहा है। वह वोट बैंक चाहकर भी उन्हें सत्ता की कुर्सी पर नहीं बैठा पा रहा है, यही उनका दर्द है।
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Created On :   30 Sept 2026 11:19 PM IST












