छत्तीसगढ़ हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ने से घरों में घुसा पानी, राहत और बचाव कार्य जारी

छत्तीसगढ़ हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ने से घरों में घुसा पानी, राहत और बचाव कार्य जारी
छत्तीसगढ़ के कोरबा में लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी किनारे और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। कोरबा के सीतामणी इलाके में हसदेव नदी का पानी घरों तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है।

कोरबा, 17 अगस्त (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के कोरबा में लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी किनारे और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। कोरबा के सीतामणी इलाके में हसदेव नदी का पानी घरों तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है।

बताया जा रहा है कि बांगो डेम से करीब 41 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, दर्री बराज के गेट खुलने के बाद भी बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर छोड़ा जा रहा है। इसके चलते हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ा है और नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

कोरबा के सीतामणि क्षेत्र में कई घरों के आसपास पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और राहत-बचाव दल सक्रिय हैं, तथा प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बांगो और दर्री जलाशय से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण निचले क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है।

प्रशासन की ओर से लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की जा रही है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है। प्रशासन की टीम प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लोगों से सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।

मौसम विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि कल उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तरी ओडिशा तटों पर बना कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा और एक 'डिप्रेशन' (कम दबाव के गहरे क्षेत्र) में बदल गया। आज, 17 अगस्त को सुबह 5:30 बजे यह डिप्रेशन तटीय पश्चिम बंगाल और उससे सटे बांग्लादेश व उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के इलाकों में केंद्रित था।

मौसम विभाग की ओर बताया गया है कि इसके अगले 24 घंटों के दौरान गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल से होते हुए झारखंड की ओर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की बहुत संभावना है।

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Created On :   17 Aug 2026 12:05 PM IST

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