सीएम धामी ने बताया देहरादून में यमुना किनारे स्थित शनि धाम का पौराणिक महत्व
देहरादून, 14 मार्च (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड अपनी पावन धरती, प्राकृतिक सौंदर्य, पवित्र नदियों और धार्मिक स्थलों के लिए हर जगह विशेष स्थान रखता है। इसी पवित्र भूमि पर देहरादून जनपद के विकासनगर क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर 'शनि धाम' है।
यह मंदिर अपने पवित्र स्थान, आस्था और आध्यात्मिक शांति का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर अपने पौराणिक महत्व को लेकर हर जगह प्रसिद्ध है। शनिवार को उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने मंदिर के महत्व को बताने के साथ पावन धाम का आनंद लेने की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने लिखा, "देहरादून जनपद के विकासनगर में यमुना नदी के तट पर स्थित शनि धाम अनेकों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। शनिवार के दिन यहां पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। आप भी देहरादून आगमन पर इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें।"
यह मंदिर शांत वातावरण, हरियाली और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस चारमंजिला मंदिर का निर्माण किया था। यह अपनी अनूठी लकड़ी-पत्थर की वास्तुकला (कोटी बनाल शैली) के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे आपदाओं से बचाती है।
इसी के साथ ही, यह मंदिर लगभग 800 वर्ष पुराना बताया जाता है, जिसे यमुना के भाई शनिदेव का घर माना जाता है। दरअसल, पुराणों के अनुसार शनिदेव और मां यमुना भाई-बहन हैं। दोनों ही सूर्य देव की संतान हैं। यमुना संज्ञा की पुत्री और शनि देव छाया के पुत्र हैं।
यही कारण है कि जब यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते हैं, तो अक्षय तृतीया के दिन शनि देव की डोली अपनी बहन यमुना को विदा करने के लिए यमुनोत्री धाम जाती है और जब भैयादूज के दिन यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होते हैं, तब शनि देव की डोली अपनी बहन यमुना को लेने के लिए यमुनोत्री धाम पहुंचती है। इसके बाद शनि देव अपनी बहन यमुना को साथ लेकर लौट आते हैं। फिर सर्दियों के पूरे समय में भाई-बहन खरसाली गांव में अपने-अपने मंदिरों में विराजमान रहते हैं।
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Created On :   14 March 2026 10:09 AM IST












