दीक्षांत समारोह: देवेंद्र फडणवीस को डॉक्टर ऑफ साइंस’ की मानद उपाधि, तीसरी बार मिली डॉक्टरेट की डिग्री

देवेंद्र फडणवीस को डॉक्टर ऑफ साइंस’ की मानद उपाधि, तीसरी बार मिली डॉक्टरेट की डिग्री
  • महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में किया गया सम्मान
  • आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण
  • सतत खेती के लिए शोध जरूरी : फडणवीस

Mumbai/ Rahuri News. राज्य के राहुरी स्थित महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के 39वे दीक्षांत समारोह में रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विश्वविद्यालय की ओर से ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के हाथों मुख्यमंत्री को यह उपाधि प्रदान की गई। इस सम्मान के बाद अब देवेंद्र फडणवीस को ‘डॉ. देवेंद्र फडणवीस’ के नाम से भी जाना जाएगा। अभी तक फडणवीस को अलग-अलग विश्वविद्यालयों से कुल तीन डॉक्टरेट की डिग्री मिल चुकी हैं। सम्मान मिलने के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें यह उपाधि देने का प्रस्ताव मिला, तब उनके मन में यह सवाल था कि इसे स्वीकार करना चाहिए या नहीं, क्योंकि कृषि क्षेत्र में अभी बहुत काम करना बाकी है। लेकिन महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को देखते हुए वे इस सम्मान को ठुकरा नहीं सके। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। पिछले दस वर्षों में सरकार ने इस क्षेत्र में कई बड़े बदलाव करने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि पहले कृषि को सीमित नजरिए से देखा जाता था, लेकिन अब सरकार ने इसमें निवेश बढ़ाने की दिशा में काम किया है।

देश की खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

महाराष्ट्र के राज्यपाल तथा महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्षों के प्रभाव को देखते हुए भारत की कृषि व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है।भारतीय कृषि का भविष्य तकनीक आधारित समाधान, स्टार्टअप और टिकाऊ खेती पद्धतियों पर निर्भर करेगा। वे राहुरी स्थित महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागार में आयोजित 39वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राज्यपाल के हाथों ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधान परिषद के सभापति प्रा. राम शिंदे, जलसंपदा मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील, कृषि मंत्री एवं विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति दत्तात्रय भरणे प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह, कुलपति डॉ. विलास खरचे और राज्यपाल के सचिव प्रशांत नारनवरे भी मौजूद रहे। राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ के साथ ‘जय अनुसंधान’ का मंत्र दिया है, जो कृषि क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन, तकनीकी प्रगति और बदलते वैश्विक परिदृश्य के कारण कृषि क्षेत्र में दूरदर्शी नेतृत्व और नवाचार की आवश्यकता बढ़ गई है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्राकृतिक और टिकाऊ खेती के प्रसार के साथ देश का पहला ‘रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन’ स्थापित करने की पहल की सराहना की।

सतत खेती के लिए शोध जरूरी : फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में बुनियादी बदलाव लाने का प्रयास किया है। ‘जलयुक्त शिवार’ योजना के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया गया, जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है। ‘मागेल त्याला शेततळे’ योजना के क्रियान्वयन में अहिल्यानगर जिला अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को पानी के साथ बिजली सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री सौर कृषि योजना शुरू की गई है। इस वर्ष के अंत तक राज्य में 14 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों को दिन में 12 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। फडणवीस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि में तकनीक का उपयोग बढ़ाना आवश्यक हो गया है। ‘एग्रीस्टैक’ योजना के तहत देश में 1 करोड़ 30 लाख किसानों को डिजिटल पहचान दी गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से कृषि में उत्पादन लागत में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी और उत्पादन में 50 प्रतिशत तक वृद्धि संभव हो रही है।

कृषि उद्यमिता की ओर बढ़ें छात्र

कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि कृषि विद्यार्थियों को नौकरी के बजाय उद्यमिता की ओर बढ़ना चाहिए और रोजगार देने वाले बनना चाहिए। उन्होंने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को समय की आवश्यकता बताया।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों को अपना ज्ञान किसानों और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित करना चाहिए।

कुलपति डॉ. विलास खरचे ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच दशकों में विश्वविद्यालय ने डेढ़ लाख से अधिक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए हैं। साथ ही 320 उच्च उत्पादक किस्में, 56 कृषि उपकरण विकसित किए गए हैं और 6284 पौध आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण किया गया है।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के हाथों विभिन्न संकायों के कुल 4602 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 4182 स्नातक, 346 स्नातकोत्तर और 74 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 42 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विधायक मोनिका राजले, जिलाधिकारी डॉ. पंकज आशिया, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद भंडारी, पुलिस अधीक्षक सोमनाथ घार्गे सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिकारी, प्राध्यापक, छात्र, अभिभावक और प्रगतिशील किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Created On :   15 March 2026 10:19 PM IST

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