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वन सिख – वन ट्री अभियान: सिख नववर्ष पर पर्यावरण संरक्षण की पहल, बच्चों ने हाथों में फलक थाम निकाली रैली, जागरूकता फैलाने वाली दैनिक भास्कर की खबरें भी एनवायरमेंट व्हाट्सऐप ग्रुप्स में हुई वायरल

Nagpur News. सिख नववर्ष 1 चेत, नानकशाही संवत 558 के पावन अवसर पर उपराजधानी की सिख संगत ने प्रकृति संरक्षण के लिए एक प्रेरक पहल करते हुए “वन सिख – वन ट्री” अभियान की शुरुआत की। पंच प्रधानी प्रबंध प्रणाली जत्थे के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक सिख परिवार को कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प दिलाना है। यह अभियान गुरबाणी के संदेश “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत” से प्रेरित है, जो प्रकृति को ईश्वर की पवित्र रचना मानते हुए उसके सम्मान और संरक्षण का संदेश देता है। इसी भावना के साथ शहर के विभिन्न गुरुद्वारा साहिबों में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए और संगत के बीच पौधों का वितरण किया गया। इस दौरान बच्चों और संगत की भागीदारी के साथ पर्यावरण जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया। खासकर बच्चों ने जागरुकता के संदेश लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जिसके बाद उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर शहर के पर्यावरणप्रेमियों और एक्सपर्ट्स ने भी आयोजन में शिरकत कर बच्चों को अहम जानकारियां दी।
पंच प्रधानी प्रबंध प्रणाली जत्थे के वरिष्ठ सदस्य बलदेव सिंह ने बताया कि सिख परंपरा में सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। लंगर सेवा, शिक्षा सेवा और निःशुल्क चिकित्सा सेवा के माध्यम से सिख समाज लंबे समय से मानवता की सेवा करता आया है। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण को भी मानवता की सेवा का एक महत्वपूर्ण रूप मानते हुए इस अभियान की शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि सिख इतिहास में प्रकृति और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है।
सातवें पातशाह गुरु हर राय साहिब ने अपने समय में उद्यानों और औषधीय बागों की स्थापना कर प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया था। इन उद्यानों में विभिन्न औषधीय पौधों का संरक्षण किया जाता था, जो मानवता की सेवा के लिए उपयोगी थे। इसी परंपरा से प्रेरित होकर सिख संगत हर वर्ष प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देती है।
गुरुद्वारे केवल अरदास और कीर्तन के स्थान नहीं हैं, बल्कि सेवा, समानता और समाज कल्याण के केंद्र भी हैं। “सरबत दा भला” की भावना के साथ यह अभियान समाज के सभी लोगों को प्रकृति की सेवा से जोड़ने का प्रयास है।
बच्चों ने निभाई जिम्मेदारी
इस अवसर पर गुरु तेग बहादुर खालसा स्कूल, बाबा बुड्ढा जी नगर के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। स्कूल परिसर में पर्यावरण जागरूकता रैली, पार्क सफाई अभियान, चित्रकला प्रतियोगिता और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल का संकल्प लिया।
शहर के गुरुद्वारों से मिला समर्थन
अभियान के पहले चरण में शहर के कई गुरुद्वारा साहिबों की ओर से संगत में सैकड़ों पौधे वितरित किए गए। इनमें गुरुद्वारा गुरु हरगोविंद साहिब दीपक नगर, गुरुद्वारा गुरु रामदास जी रामदासपेठ, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा कामठी रोड, गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर बाबा बुड्ढा जी नगर, गुरु नानक दरबार गुरुनानकपुरा, गुरुद्वारा श्री गुरु अमरदास जी वाड़ी और गुरुद्वारा डिफेंस कॉलोनी शामिल हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस तक चलेगा अभियान
पंच प्रधानी जत्थे के सदस्य स्वर्ण सिंह, सतपाल सिंह, इंदरजीत सिंह, सविंदर सिंह, हरबीर सिंह और बलदेव सिंह ने संगत, स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों और गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों का आभार व्यक्त किया। गुरुद्वारा साहिब के पूर्व मुख्यसेवादार निशान सिंह सहित कमेटी के अन्य मैंबर भी शामिल थे।
आयोजकों के अनुसार आने वाले समय में शहर के अन्य गुरुद्वारा साहिब, शिक्षण संस्थान और सिख सामाजिक संगठन भी इस अभियान से जुड़ेंगे। यह पहल 5 जून 2026 – विश्व पर्यावरण दिवस तक व्यापक रूप से जारी रहेगी।
गुरबाणी का संदेश
गुरबाणी में ईश्वर की सृष्टि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा गया है —
“बलिहारी कुदरत वसिया, तेरा अंत न जाई लखिया॥ रहाउ॥”
अर्थात ईश्वर की सृजन शक्ति समस्त सृष्टि में व्याप्त है और उसकी महिमा का अंत नहीं जाना जा सकता। यही संदेश प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की प्रेरणा देता है।
एनवायरमेंट ग्रुप्स में चर्चा का विषय बनी जागरूकता की खबरें
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस अभियान को लेकर सोशल मीडिया और विशेष रूप से विभिन्न एनवायरमेंट व्हाट्सऐप ग्रुप्स में भी व्यापक चर्चा देखने को मिली। पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने वाली दैनिक भास्कर की खबरें इन ग्रुप्स में प्रमुखता से साझा की गईं।
इन खबरों को सैकड़ों लोगों ने पढ़ा और आगे साझा करते हुए पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चिंताओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। लोगों ने वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण की पहल का समर्थन करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी कदम बताया। इस तरह डिजिटल माध्यमों के जरिए भी पर्यावरण जागरूकता का संदेश तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
Created On :   15 March 2026 7:15 PM IST












