दिल्ली में अंतिम हिंदू सम्राट हेमू का विजयोत्सव सम्पन्न, प्रधानमंत्री के 'मन की बात' में उल्लेख पर जताया आभार

दिल्ली में अंतिम हिंदू सम्राट हेमू का विजयोत्सव सम्पन्न, प्रधानमंत्री के मन की बात में उल्लेख पर जताया आभार
रौनियार वैश्य सभा, दिल्ली (पंजी.) के तत्वावधान में अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) को समर्पित 'विजयोत्सव' का आयोजन बुधवार को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों, इतिहास प्रेमियों और युवाओं ने भाग लिया।

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। रौनियार वैश्य सभा, दिल्ली (पंजी.) के तत्वावधान में अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) को समर्पित 'विजयोत्सव' का आयोजन बुधवार को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों, इतिहास प्रेमियों और युवाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि प्रख्यात लेखक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतुल सिंघल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

विजयोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना था। सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि 30 अगस्त को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के इतिहास के उपेक्षित नायक और अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) का उल्लेख किया था, जिससे रौनियार वैश्य समाज खुद को सम्मानित और गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

सभा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले हजारों रौनियार वैश्य परिवारों और देशभर में फैले लगभग एक करोड़ रौनियार समाज की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया गया है।

सभा के अनुसार, 'मन की बात' कार्यक्रम के बाद आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि समाज की प्रमुख मांगों को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। इसी क्रम में प्रधानमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि सम्राट हेमू की एक भव्य आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि सासाराम (बिहार) में स्थापित की जाए और उसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाए। साथ ही, सम्राट हेमू के जीवन और योगदान को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी मांग की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सम्राट हेमू भारतीय इतिहास के उन महान योद्धाओं और कुशल प्रशासकों में शामिल थे, जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर अपने पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और संगठन कौशल के बल पर इतिहास में विशेष स्थान बनाया। उन्होंने विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान की रक्षा की और राष्ट्रभक्ति तथा साहस का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर समाज के पूर्व अध्यक्ष और शोधकर्ता सुबोध कुमार गुप्ता द्वारा लगभग 15 वर्षों के शोध के बाद लिखी गई पुस्तक 'आखिर कौन था - हेमू अंतिम हिन्दू सम्राट अंतिम विक्रमादित्य' का भी विशेष उल्लेख किया गया। सभा के अनुसार, इस शोध में ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर हेमू को रौनियार वैश्य समाज से संबंधित बताया गया है। इस शोध कार्य को विभिन्न विश्वविद्यालयों और इतिहासकारों द्वारा सराहना भी मिल चुकी है।

मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि इतिहास के ऐसे विस्मृत नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना समय की आवश्यकता है। वहीं सभा के अध्यक्ष सुबोध प्रसाद पंकज और राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि रौनियार वैश्य समाज इस दिशा में हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और उसे उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी।

कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, इतिहास संरक्षण और सम्राट हेमू के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।

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Created On :   7 Oct 2026 11:41 PM IST

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