साइबर ठगी मामले में सीबीआई की कार्रवाई, राजकोट से करनाल निवासी आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के करनाल निवासी एक आरोपी को गुजरात के राजकोट से गिरफ्तार किया। सीबीआई ने बताया कि आरोपी को 30 जून को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई उस मामले की जांच के दौरान की गई, जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर लाखों रुपए की ठगी की गई थी।
सीबीआई के अनुसार, यह मामला पहले मध्य प्रदेश पुलिस की राज्य साइबर अपराध शाखा, भोपाल के पास दर्ज था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के 1 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। इसके बाद सीबीआई ने 11 अप्रैल 2026 को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच एजेंसी के मुताबिक, पीड़ित एक वरिष्ठ नागरिक है, जिन्हें खुद को सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले अज्ञात लोगों ने फोन किया था। कॉल करने वालों ने दावा किया कि पीड़ित के बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में हुआ है और यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
सीबीआई ने बताया कि आरोपियों ने अपने झूठे दावों को विश्वसनीय बनाने के लिए एक फर्जी संपत्ति कुर्की आदेश (अटैचमेंट ऑर्डर) भी पीड़ित को भेजा। लगातार धमकी और मानसिक दबाव के कारण पीड़ित ने दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल 25.65 लाख रुपए स्थानांतरित कर दिए।
जांच के दौरान सीबीआई ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे राजकोट से गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने यह भी बताया कि सक्षम अदालत से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद पीड़ित को ठगी गई राशि में से 2.65 लाख रुपए वापस दिलाने में सफलता मिली है।
सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल थे और ठगी की रकम का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।
सीबीआई ने नागरिकों से अपील की है कि वे 'डिजिटल अरेस्ट', फर्जी निवेश योजनाओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर आने वाले नकली कॉल और अन्य साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहें। एजेंसी ने सलाह दी है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या निकटतम पुलिस स्टेशन को देने की सलाह दी गई है।
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Created On :   1 July 2026 11:22 PM IST












