दो पहाड़ों के बीच बसा है बाबा नीम करौली का चमत्कारी धाम, लाखों भक्तों की है अटूट आस्था

दो पहाड़ों के बीच बसा है बाबा नीम करौली का चमत्कारी धाम, लाखों भक्तों की है अटूट आस्था
उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों में बसा श्री कैंची धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं बल्कि, अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था, शांति और अटूट विश्वास का धार्मिक केंद्र बना हुआ है। नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) का एक पवित्र आध्यात्मिक आश्रम है।

नैनीताल, 1 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों में बसा श्री कैंची धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं बल्कि, अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था, शांति और अटूट विश्वास का धार्मिक केंद्र बना हुआ है। नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) का एक पवित्र आध्यात्मिक आश्रम है।

मान्यता है कि बाबा नीम करोली महाराज के दर से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता और इसी विश्वास के साथ देश-विदेश से लाखों भक्त इस पावन धरा पर शीश नवाते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर जोर दिया है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, "नैनीताल जिले में मौजूद कैंची धाम सबसे पूजनीय बाबा नीम करोली महाराज जी की कड़ी तपस्या की पवित्र जगह है और लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। पहाड़ों की शांत घाटियों में बसा यह दिव्य धाम आध्यात्मिक शांति और पॉजिटिव एनर्जी का एक अनोखा अनुभव देता है। नैनीताल आने पर, बाबा नीम करोली महाराज जी के इस पवित्र धाम के दर्शन जरूर करें।"

नैनीताल जिले के भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह पावन धाम 20वीं सदी के महान संत श्री नीम करोली बाबा की दिव्य कर्मस्थली और साधना भूमि है। यहां की अलौकिक ऊर्जा और शांत वातावरण हर उस व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है, जो जीवन के कोलाहल से दूर आत्मिक शांति की तलाश में निकलता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्री कैंची धाम दो पहाड़ियों के बीच कैंची के आकार (घुमावदार मोड़ों) वाली घाटी में स्थित है, इसलिए इसे 'कैंची धाम' कहा जाता है। आश्रम की स्थापना 1960 के दशक (वर्ष 1964) में नीम करोली बाबा द्वारा की गई थी। 15 जून 1964 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कैंची धाम आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन किया गया था। यहां मुख्य रूप से हनुमान जी का मंदिर है।

कैंची धाम पहले एक घना जंगल हुआ करता था, जहां संत सोमवारी महाराज और प्रेमी बाबा साधना करते थे। बाबा नीम करोली ने यहां आकर आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की और स्थानीय निवासी पूर्णानंद की दान की गई भूमि पर आश्रम बनवाया।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   1 Sept 2026 12:39 PM IST

Tags

Next Story