फैक्ट चेकः कोर कमांडर को हटाने का दावा फर्जी, एआई से बनाया झूठा दस्तावेज

फैक्ट चेकः कोर कमांडर को हटाने का दावा फर्जी, एआई से बनाया झूठा दस्तावेज
सोशल मीडिया पर भारतीय सेना से जुड़ा एक कथित आधिकारिक दस्तावेज फैक्ट चैक में पूरी तरह से फर्जी पाया गया है। सेना ने इसकी पुष्टि करते हुए को दस्तावेज को फर्जी बताया है। इस जाली दस्तावेज में दावा किया जा रहा था कि भारतीय सेना की 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। यह झूठ पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया प्लेटफार्म से फैलाया गया है।

नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (आईएएनएस)। सोशल मीडिया पर भारतीय सेना से जुड़ा एक कथित आधिकारिक दस्तावेज फैक्ट चैक में पूरी तरह से फर्जी पाया गया है। सेना ने इसकी पुष्टि करते हुए को दस्तावेज को फर्जी बताया है। इस जाली दस्तावेज में दावा किया जा रहा था कि भारतीय सेना की 15वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। यह झूठ पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया प्लेटफार्म से फैलाया गया है।

सेना के अनुसार, यह दावा पूरी तरह भ्रामक है। फैक्ट चेक में सामने आया है कि प्रसारित किया जा रहा दस्तावेज एआई की मदद से तैयार किया गया फर्जी दस्तावेज है। सेना ने इसमें मौजूद कई ऐसी स्पष्ट खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिन्हें सोशल मीडिया एकाउंट्स ने नजरअंदाज किया। भारतीय सेना के अनुसार, कुछ पाकिस्तान समर्थित प्रॉपेगेंडा एकाउंट्स ने इस फर्जी दस्तावेज को प्रसारित करते हुए इसे पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी की कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस से जोड़ने की कोशिश की। दस्तावेज के आधार पर यह माहौल बनाने का प्रयास किया गया कि लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह को पाकिस्तान की प्रेसवार्ता के बाद 15वीं कोर की कमान से हटा दिया गया है। हालांकि, यह बात पूरी तरह से निराधार है।

सेना ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश वास्तविक नहीं है। वहीं दस्तावेज में दिखाई देने वाली भाषा, प्रारूप और अन्य विवरणों में भी ऐसी विसंगतियां हैं, जो इसके फर्जी होने की ओर इशारा करती हैं। सेना ने इस पूरे मामले को एक खास तरह के दुष्प्रचार के पैटर्न के रूप में सामने रखा है। पहले फर्जी दस्तावेज बनाए गए। खुद इन दावों को सच बताने के तर्क गढ़े गए। नकली आधिकारिक प्रारूप का एक साथ कई सोशल मीडिया एकाउंट्स से प्रसार किया गया।

सेना का कहना है कि इस तरीके से भारतीय सशस्त्र बलों को लेकर भ्रम पैदा करने और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई। इस दुष्प्रचार के बीच सेना ने 29 सितंबर को हुई एक महत्वपूर्ण संयुक्त कार्रवाई का भी उल्लेख किया है।

सेना के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को 29 सितंबर को भारतीय सेना ने संयुक्त अभियान में मार गिराया था। उपलब्ध रिपोर्टों में इस अभियान को बडगाम के यूसमर्ग क्षेत्र में हुई कार्रवाई से जोड़ा गया है।

इसी घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आए और उनके बीच फर्जी दस्तावेज को भी तेजी से प्रसारित किया गया। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ध्यान में ऐसे कई खातों की जानकारी भी रखी गई है, जिन पर एक ही सामग्री को लगभग एक ही समय में प्रसारित किया गया है। इनमें रिटर्नबाबाएस, शैडोफॉक्स 11, रिमलैंड इंटेल, खोरासानघाग, वारअपडेट्सपीपी, जरब-ए-जुल्फिकार, कॉन्फ्लिक्टवॉचएक्स, उथमानरूमी 2025 और क्रूसिबल0001 जैसे पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडलस शामिल हैं।

सेना के अनुसार, इन खातों से रात 9 बजकर 22 मिनट से 11 बजकर 22 मिनट के बीच एक जैसे संदेशों का प्रसार किया गया। भारतीय सेना ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले ऐसे दस्तावेजों और दावों को बिना सत्यापन शेयर न करें या आगे न बढ़ाएं। खासकर सैन्य अधिकारियों, अभियानों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।

सेना का साफ संदेश है कि फर्जी दस्तावेज को असली आदेश समझकर साझा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर या कथित सरकारी पत्र कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। ऐसे में गलत सूचना को रोकने में नागरिकों की सतर्कता भी महत्वपूर्ण है।

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Created On :   2 Oct 2026 5:52 PM IST

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